उत्तराखंड में बाघ संरक्षण की महत्वाकांक्षी पहल को नया बल मिला है। राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी हिस्से में बाघों की स्थायी और संतुलित आबादी विकसित करने की दिशा में दूसरे चरण की तैयारी शुरू हो गई है।
राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ाने की दिशा में एक और बड़ी सफलता मिली है। पार्क प्रशासन को अब कार्बेट नेशनल पार्क से पांच और बाघों को लाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से सहमति मिल गई है। इनमें तीन बाघिन और दो बाघ शामिल हैं। पार्क प्रशासन ने इसके लिए एनटीसीए के समक्ष प्रस्तुतीकरण दिया था। इससे क्षेत्र पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों के कुनबे के विस्तार और जैव विविधता संरक्षण को नई मजबूती मिलने की उम्मीद जगी है।
पिछले कई वर्षों से राजाजी टाइगर रिजर्व के पश्चिमी क्षेत्र में बाघों की स्थायी आबादी विकसित करने के प्रयास किए जा रहे थे। इसी उद्देश्य से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के मार्गदर्शन में बाघ पुनर्वास परियोजना शुरू की गई थी। इसके तहत दिसंबर 2020 में पहला बाघ सफलतापूर्वक यहां लाया गया था।
वर्ष 2020 से 2025 के बीच कार्बेट से कुल पांच बाघों (तीन बाघिन और दो बाघ) को राजाजी के पश्चिमी क्षेत्र में स्थानांतरित किया गया। सभी बाघों का मेडिकल परीक्षण करने के बाद उन्हें सैटेलाइट रेडियो कॉलर पहनाकर जंगल में छोड़ा गया था, ताकि उनकी गतिविधियों और स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखी जा सके। मई 2025 में पांचवें बाघ को मोतीचूर रेंज में छोड़े जाने के साथ परियोजना का पहला चरण पूरा हुआ था।
अब दूसरे चरण के तहत फिर से तीन बाघिन और दो बाघ राजाजी लाए जाएंगे। वन अधिकारियों का मानना है कि इससे पश्चिमी-दक्षिणी क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ उनका प्राकृतिक प्रजनन भी तेज होगा। इससे न केवल वन्यजीव संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि राजाजी देश के प्रमुख बाघ आवासों में और अधिक मजबूत पहचान बना सकेगा।
पूर्व में उम्मीदों को लगा था झटका
राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन नेशनल पार्क के पश्चिमी हिस्से में बाघों की आबादी बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। वर्ष 2024 में यहां बाघिन ने चार शावकों को जन्म दिया तो राजाजी प्रशासन को उम्मीदें भी जगीं, लेकिन इस कवायद को झटका तब लगा जब दो शावकों को गुलदार ने हमला कर शिकार बना लिया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गुलदार के निशान सामने आए थे। हालांकि बाद में दो शावकों का अभी भी पता नहीं चल पाया था। वहीं 2020 से 2025 तक लाए गए पांच बाघों में से तीन बाघों की पार्क की से बाहर चले जाने की आशंका है। जिनमें से एक बाघ कभी कभार पार्क सीमा के भीतर आ जाता है।
बाघ विहीन था पश्चिमी क्षेत्र
राजाजी टाइगर रिजर्व में कुल 55 बाघ हैं। सभी बाघ पूर्वी क्षेत्र में हैं क्योंकि यह क्षेत्र नेशनल कार्बेट पार्क से जुड़ा हुआ है। पश्चिमी हिस्सा बाघ विहीन हो गया था। अत्यधिक मानवीय निर्मित अवरोधों के चलते बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था। राजाजी नेशनल पार्क गंगा के कारण पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में बंटा हुआ है। पूर्वी क्षेत्र में तीन रेंज (गौरी, चोला व रवासन रेंज) और पश्चिमी क्षेत्र में सात रेंज (हरिद्वार, कांसरो, मोतीचूर, धोलखंड, बेरीबाड़ा, चीलावाली व रामगढ़) हैं। पश्चिमी क्षेत्र में मानव निर्मित अवरोध सड़कें व चीला नहर आदि होने से यहां बाघों का मूवमेंट नहीं हो पा रहा था जबकि यहां प्रचुर मात्रा में संसाधन हैं। यह क्षेत्र कहीं ज्यादा बाघों को वहन कर सकता है।
2016 में बनी थी बाघ शिफ्टिंग योजना
राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों का कुनबा बढ़ाने के लिए बाघ शिफ्टिंग योजना वर्ष 2016 में बनाई गई थी। वर्ष 2018 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से इसे मंजूरी मिली। 24 दिसंबर 2020 को पहले बाघ को मोतीचूर में शिफ्ट किया गया था। इसके बाद नौ जनवरी 2021 को बाघिन, 20 मई 2023 को बाघिन, 16 मार्च 2024 को बाघिन और अब एक मई 2025 को एक बाघ को यहां शिफ्ट किया गया।
पार्क के पश्चिमी क्षेत्र में पांच बाघों को फिर लाए जाने के लिए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) प्रस्तुतीकरण दिया गया है। एनटीसीए ने बाघों को लाने की सहमति दी है। जल्द ही लिखित में यह सहमति प्राप्त हो जाएगी। जिसके बाद अन्य प्रक्रियाएं शुरू होंगी। – कोको रोशे, निदेशक, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क।