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तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान संकट का असर, सेंसेक्स 1,124 अंक लुढ़का; निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे

भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत टूटकर 72,771.72 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी50 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर आ गया। सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 73,895.74 से 160.91 अंक यानी 0.21 प्रतिशत नीचे 73,734.83 पर खुला। कारोबार के दौरान यह एक समय 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत टूटकर 72,716.23 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह निफ्टी50 पिछले बंद स्तर 23,140.50 से 0.32 प्रतिशत गिरकर 23,064.90 पर खुला। कारोबार के दौरान यह 378.3 अंक यानी 1.63 प्रतिशत तक टूटकर 22,762.20 के निचले स्तर पर पहुंच गया।
ईरान संकट और महंगे तेल ने बढ़ाई चिंता
बाजार में गिरावट के पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के साथ वैश्विक स्तर पर बढ़ी आर्थिक अनिश्चितता प्रमुख कारण रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के नवीनतम प्रस्ताव को अस्वीकार किए जाने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड में भी उछाल आया। इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बाजार में बिकवाली बढ़ गई। व्यापक बाजार में भी दबाव देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप 100 में 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
PSU बैंक सबसे ज्यादा दबाव में
सेक्टरवार कारोबार की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक में भी कमजोरी रही। इसके मुकाबले निफ्टी आईटी में सबसे कम गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इंफोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर बाकी सभी शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इनमें टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट रही।
बाजार पूंजीकरण में 8 लाख करोड़ की कमी
शेयर बाजार में तेज गिरावट का असर कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण पर भी पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का बाजार पूंजीकरण शुक्रवार के करीब 482 लाख करोड़ रुपये से घटकर 474 लाख करोड़ रुपये रह गया। यानी निवेशकों की संपत्ति में एक ही कारोबारी दिन में करीब 8 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।
एशियाई बाजार भी लाल निशान में
वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में दबाव देखने को मिला। अधिकांश एशियाई बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का सूचकांक करीब 2 प्रतिशत और जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत नीचे रहा। चीन के बाजार भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट में रहे।
महंगा कच्चा तेल भारत के लिए क्यों चिंता?
पश्चिम एशिया संकट का समाधान नहीं होने के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए महंगाई और चालू खाता घाटे की चुनौती बढ़ा सकती हैं, क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत बढ़कर 106.6 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया तेल की कीमतों में तेजी और महंगाई बढ़ने की आशंका के बीच बॉन्ड बाजार में भी बिकवाली फिर से शुरू हो गई।

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