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अमेरिका-ईरान बातचीत में तनाव, JD वेंस बोले- राष्ट्रपति ट्रंप की शर्तें मानने को तैयार नहीं तेहरान

अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला। परमाणु मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच जिनेवा परोक्ष रूप से वार्ता हुई। ईरानी मीडिया के अनुसार, ये बैठक करीब तीन घंटे चली। वहीं इस पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ईरान राष्ट्रपति ट्रंप की शर्ते मानने को तैयार नहीं है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत को लेकर ताजा बयान सामने आया है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि ईरान अभी तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से तय की गई मुख्य शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं है।

जेडी वेंस ने क्या कहा?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि जिनेवा में हुई बातचीत ‘कुछ मायनों में ठीक रही’, क्योंकि दोनों देशों ने आगे भी बैठक जारी रखने पर सहमति जताई है। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि ईरान ने अब तक ट्रंप की प्रमुख शर्तों को स्वीकार नहीं किया है। उनके मुताबिक- राष्ट्रपति ट्रंप ने कूटनीतिक समाधान के लिए कुछ स्पष्ट शर्तें रखी हैं। इन शर्तों में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। ईरान अभी इन शर्तों पर खुलकर सहमति देने को तैयार नहीं दिख रहा।

क्या है अमेरिका का रुख?
जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका अभी भी बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत बेनतीजा रही, तो आगे क्या करना है- इसका फैसला राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे। उनका कहना था, ‘हम चाहते हैं कि मामला बातचीत से सुलझे, लेकिन अगर कूटनीति की सीमा खत्म हो जाती है, तो अंतिम फैसला राष्ट्रपति का होगा।’

क्यों बढ़ा है अमेरिका-ईरान के बीच तनाव?
अमेरिका लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित है। ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों पर कड़ी रोक लगाए। वहीं ईरान अपने अधिकारों और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देता रहा है।

दूसरे दौर की वार्ता का नहीं निकला कोई नतीजा
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जिनेवा में बातचीत का दूसरा दौर खत्म हो गया है। ईरान की सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह बैठक लगभग तीन घंटे तक चली, जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला है। मंगलवार को हुई यह मुलाकात परमाणु मुद्दे पर दोनों देशों के बीच दूसरे दौर की बातचीत थी। जिनेवा में वार्ता व अभ्यास ऐसे समय हुए जब अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ा दी है।

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