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आज है वैशाख की मासिक दुर्गाष्टमी

हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को ‘मासिक दुर्गाष्टमी’ का पावन पर्व मनाया जाता है। इस बार वैशाख माह की मासिक दुर्गाष्टमी 24 अप्रैल को पड़ रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन मां भवानी को प्रसन्न करने और उनकी विशेष कृपा पाने के लिए अत्यंत शुभ है। इस दिन आप खास पूजा विधि से मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

मासिक दुर्गाष्टमी का विशेष महत्व
मासिक दुर्गाष्टमी के दिन मां दुर्गा की उपासना करने से परिवार में खुशहाली और शांति बनी रहती है। माता रानी अपने भक्तों के जीवन में चल रही सभी समस्याओं का अंत करती हैं और उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान करती हैं। अगर आप इस दिन पर विधि-विधान से पूजा करते हैं, तो इससे आपको करियर में उन्नति मिल सकती है और मनोवांछित फल भी मिलता है।

मां दुर्गा की पूजा की सरल विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और लाल रंग के कपड़े पहनें।
पूरे घर और पूजा स्थल को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
एक साफ लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और माता रानी की मूर्ति या तस्वीर को स्थापित करें।
मां दुर्गा को लाल चुनरी समेत ‘सोलह शृंगार’ की सामग्री जरूर चढ़ाएं।
माता को हलवा-पूरी, काले चने, खीर, ताजे फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
शुद्ध घी का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक दुर्गा चालीसा का पाठ करें
अंत में माता की आरती उतारें और प्रसाद सभी में बांटें।

मां दुर्गा को प्रसन्न करने वाले शक्तिशाली मंत्र
पूजा के समय श्रद्धा के साथ मां दुर्गा के इन मंत्र का जप करें –

दुर्गा बीज मंत्र: ॐ दुं दुर्गायै नमः।
दुर्गा नवार्ण मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
दुर्गा गायत्री मंत्र: ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
दुर्गा अष्टाक्षर मंत्र: ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः।
दुर्गा ध्यान मंत्र: ॐ जटा-जूट-समायुक्तमर्धेन्दु-कृत-लक्षणाम्। लोचनत्रय-संयुक्तां पद्मेन्दुसद्यशाननाम्॥

पूजा में रखें ये सावधानियां
व्रत और पूजा करने वाले साधक को मांस-मदिरा और लहसुन-प्याज से पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए।
पूजा के समय भूलकर भी काले रंग के कपड़े न पहनें। इस दिन लाल या पीले वस्त्र उत्तम माने गए हैं।
व्रत के दौरान किसी का अपमान न करें, झूठ न बोलें और क्रोध करने से बचें; अन्यथा व्रत का फल नष्ट हो जाता है।
ब्रह्मचर्य का पालन करें और यदि संभव हो तो बिस्तर की बजाय जमीन पर सोएं।
पूजा के अंत में, जाने-अनजाने में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए मां जगदंबे से हाथ जोड़कर क्षमा याचना करें।
जो लोग मासिक दुर्गाष्टमी पर व्रत करते हैं, वे शाम के समय माता की आराधना के बाद गेहूं और गुड़ से बनी चीजों से अपना व्रत खोलें।

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