<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>सेहत &#8211; Bharat Ki Tasveer</title>
	<atom:link href="https://bharatkitasveer.com/category/%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%A4/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://bharatkitasveer.com</link>
	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Fri, 26 Jun 2026 12:35:01 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.8.5</generator>
	<item>
		<title>खाना पकाने वाले तेल को कहीं आप भी तो नहीं करते गलत तरह से स्टोर? एक्सपर्ट ने बताया ऑयल रखने का सही तरीका</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 12:35:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%a4%e0%a5%87%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a5%80/</guid>

					<description><![CDATA[भारतीय रसोई में सरसों तेल, रिफाइंड ऑयल, ऑलिव ऑयल और अन्य कुकिंग ऑयल का रोजाना इस्तेमाल होता है। लेकिन अक्सर लोग तेल खरीदने के बाद उसे स्टोर करने के तरीके पर ध्यान नहीं देते। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल को गलत तरीके से रखने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, स्वाद बदल सकता है और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img width="1023" height="575" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2.png" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2.png 1023w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2-768x432.png 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2-390x220.png 390w" sizes="(max-width: 1023px) 100vw, 1023px"></p>
<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://images.openai.com/static-rsc-4/SicM0N3xBLzOeMk7xwX2gV_z5a2kc3c4sw_56f_DL8zpPedFskKb3HrRbY4aKUuCdQqAzHINACMEaShA5grK8c7iSOz4xHecQGGJlzleKw3y1IBfm1NWRwvDbilBcsaIEZxzQBkzyjBFx8aRQOC7gpwXJ5KSJf-DfGmbp37Unr0?purpose=inline" alt="https://images.openai.com/static-rsc-4/HipagMrj12RXKSm1RBd6Zmp1O03LZQw5kJI9uesBHg1gpBmXj5y3KLJUYYzLCEVGJB4-9jY0L1rXGUmDrAGHtY5sJfIeAOknP1ZI4nly46uwizadgr22Xx4L3KOkdGVeAzKUhgXlIRvNjffCwxbAHUbOkA7Y112tW12GfExpaYQTVuVCQza8Dl1nlG3Z_X-L?purpose=fullsize"></figure>
<p>भारतीय रसोई में सरसों तेल, रिफाइंड ऑयल, ऑलिव ऑयल और अन्य कुकिंग ऑयल का रोजाना इस्तेमाल होता है। लेकिन अक्सर लोग तेल खरीदने के बाद उसे स्टोर करने के तरीके पर ध्यान नहीं देते। विशेषज्ञों के अनुसार, तेल को गलत तरीके से रखने पर उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है, स्वाद बदल सकता है और कुछ मामलों में यह सेहत के लिए भी नुकसानदायक साबित हो सकता है।</p>
<p>न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि खाना पकाने वाले तेल को सही तापमान, सही कंटेनर और सही स्थान पर रखना बेहद जरूरी है। आइए जानते हैं तेल को स्टोर करने का सही तरीका और किन गलतियों से बचना चाहिए।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">क्यों खराब हो सकता है कुकिंग ऑयल?</h2>
<p>तेल हवा, गर्मी और तेज रोशनी के संपर्क में आने पर ऑक्सीडाइज होने लगता है। इस प्रक्रिया के कारण तेल की गुणवत्ता घट सकती है और उसका स्वाद व सुगंध भी प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक गलत तरीके से रखा गया तेल बासी (Rancid) हो सकता है, जिससे उसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">कुकिंग ऑयल को स्टोर करने का सही तरीका</h2>
<h3 class="wp-block-heading">1. धूप और गर्मी से दूर रखें</h3>
<p>तेल को हमेशा ऐसी जगह रखें जहां सीधी धूप न आती हो। गैस स्टोव, ओवन या माइक्रोवेव के पास तेल रखने से उसका तापमान बढ़ सकता है, जिससे उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h3 class="wp-block-heading">2. ढक्कन हमेशा अच्छी तरह बंद रखें</h3>
<p>तेल की बोतल या कंटेनर को इस्तेमाल के बाद तुरंत बंद कर देना चाहिए। हवा के संपर्क में आने से तेल जल्दी खराब हो सकता है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h3 class="wp-block-heading">3. गहरे रंग की बोतल बेहतर</h3>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, ऑलिव ऑयल जैसे तेलों को गहरे रंग की कांच की बोतलों में रखना बेहतर माना जाता है। इससे रोशनी का प्रभाव कम पड़ता है और तेल लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h3 class="wp-block-heading">4. ज्यादा मात्रा में स्टॉक न करें</h3>
<p>जरूरत से ज्यादा तेल खरीदकर लंबे समय तक स्टोर करना सही नहीं माना जाता। कम मात्रा में खरीदने से तेल ताजा बना रहता है और खराब होने की संभावना भी कम होती है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h3 class="wp-block-heading">5. साफ और सूखे कंटेनर का इस्तेमाल करें</h3>
<p>तेल रखने वाला बर्तन पूरी तरह साफ और सूखा होना चाहिए। नमी या पानी के संपर्क में आने से तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">फ्रिज में तेल रखना चाहिए या नहीं?</h2>
<p>यह तेल के प्रकार पर निर्भर करता है।</p>
<ul class="wp-block-list">
<li>ऑलिव ऑयल को ठंडी और अंधेरी जगह पर रखा जा सकता है।</li>
<li>नारियल तेल ठंड में जम सकता है, जो सामान्य बात है।</li>
<li>अधिकांश कुकिंग ऑयल को फ्रिज में रखने की जरूरत नहीं होती।</li>
</ul>
<p>हालांकि, बहुत गर्म मौसम वाले क्षेत्रों में निर्माता के निर्देशों का पालन करना बेहतर रहता है।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">इन गलतियों से जरूर बचें</h2>
<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="1023" height="575" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2.png" alt="" class="wp-image-171571" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2.png 1023w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2-768x432.png 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/image-2-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 1023px) 100vw, 1023px"></figure>
<ul class="wp-block-list">
<li>गैस चूल्हे के ठीक पास तेल रखना</li>
<li>खुला तेल लंबे समय तक छोड़ना</li>
<li>पुराने और नए तेल को मिलाना</li>
<li>बार-बार इस्तेमाल किया हुआ तेल दोबारा उपयोग करना</li>
<li>प्लास्टिक कंटेनर में लंबे समय तक तेल स्टोर करना</li>
</ul>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">बार-बार गर्म किया हुआ तेल कितना खतरनाक?</h2>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, एक ही तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें हानिकारक यौगिक बनने लगते हैं। इससे हृदय स्वास्थ्य और पाचन तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।</p>
<p>इसलिए डीप फ्राई के लिए इस्तेमाल किए गए तेल का बार-बार उपयोग करने से बचना चाहिए।</p>
<hr class="wp-block-separator has-alpha-channel-opacity">
<h2 class="wp-block-heading">निष्कर्ष</h2>
<p>खाना पकाने वाले तेल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसे धूप, गर्मी और हवा से बचाकर रखना जरूरी है। सही कंटेनर, सही तापमान और सीमित स्टॉक रखने की आदत न केवल तेल को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है बल्कि परिवार की सेहत की रक्षा भी करती है। छोटी-सी सावधानी आपके कुकिंग ऑयल को खराब होने से बचा सकती है और भोजन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रख सकती है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title> इन वजहों से रातभर बदलते हैं आप करवटें…</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%ad%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 26 Jun 2026 06:30:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%87%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%9c%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%ad%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a4%a6%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%88/</guid>

					<description><![CDATA[लॉजिक कहता है कि दिनभर की थकान के बाद शरीर को रात में गहरी नींद आनी चाहिए, जबकि कुछ लोगों के मामले में यह लॉजिक फेल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो रातभर करवटें बदलते रहते हैं पर नींद आती ही नहीं। पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? चलिए नींद न &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="714" height="371" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/oiyy.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async"></p>
<p>लॉजिक कहता है कि दिनभर की थकान के बाद शरीर को रात में गहरी नींद आनी चाहिए, जबकि कुछ लोगों के मामले में यह लॉजिक फेल हो जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो रातभर करवटें बदलते रहते हैं पर नींद आती ही नहीं। पर कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? चलिए नींद न आने के कारणों के बारे में डिटेल में बात करते हैं।</p>
<p><strong>थकान के बावजूद नींद न आने के कारण<br /></strong>रात में नींद न आने के बहुत से कारण होते हैं, आइए इनके बारे में जानते हैं:</p>
<p><strong>इंसोम्निया<br /></strong>जब शरीर पूरी तरह से थकने के बाद भी रात में सो नहीं पाता तो इसे अक्सर इंसोम्निया कहा जाता है। इंसोम्निया एक तरह का स्लीप डिसऑर्डर है, जिसमें व्यक्ति को सोने में परेशानी होने के साथ ही गंभीर मामलों में रातभर नींद तक नहीं आती।</p>
<p><strong>तनाव और एंग्जाइटी<br /></strong>सोते समय दिमाग में विचार आते रहना, किसी बात को लेकर लंबे समय से चिंता और एंग्जाइटी जैसी समस्याएं स्लीप साइकल बिगाड़ देती हैं।</p>
<p><strong>थायरॉइड<br /></strong>अगर आपका थायरॉइड लेवल बैलेंस नहीं है तो यह नींद न आने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि अकेले नींद न आने की दिक्कत को थायरॉइड डिसऑर्डर से नहीं जोड़ा जा सकता है।</p>
<p><strong>मेनोपॉज</strong><br />महिलाओं को नींद न आने की एक वजह मेनोपॉज भी है, क्योंकि इस दौरान शरीर में कई तरह के हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। इसके साथ अगर हॉट फ्लैश और पसीना बहुत आ रहा है तो इस संकेत को अनदेखा न करें।</p>
<p><strong>दवाइयां<br /></strong>ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन और एंग्जाइटी से बचने के लिए ली जा रही दवाइयां भी स्लीप साइकल बिगाड़ती हैं। इस बारे में डॉक्टर से सलाह ली जा सकती है।</p>
<p><strong>बेहतर नींद के लिए टिप्स<br /></strong>सोते समय कमरे में पर्याप्त अंधेरा होने के साथ हल्की ठंडक भी होनी चाहिए। वहीं, नींद के लिए शांति कितनी जरूरी है यह तो आप जानते ही हैं।</p>
<p>सोने का एक समय तय करें ताकि बॉडी क्लॉक उसी तरह से खुद को ढाल पाए।</p>
<p>कैफीन, शराब, निकोटीन के सेवन और सोने के समय के बीच कम से कम 4-6 घंटे का गैप रखें।</p>
<p>ज्यादा स्क्रीन टाइम भी स्लीप साइकल खराब करता है, सोने से 1 घंटे पहले ही मोबाइल और लैपटॉप अलग रख दें।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या लोहे की कड़ाही में खाना पकाना सच में फायदेमंद है?</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 25 Jun 2026 06:30:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a4%be/</guid>

					<description><![CDATA[आजकल हमारी रसोई में एक बड़ा और अच्छा बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग मॉडर्न बर्तनों की जगह वापस अपने पुराने और पारंपरिक बर्तनों की तरफ लौट रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चलन ‘लोहे की कड़ाही’ का बढ़ रहा है। दादी-नानी के जमाने से माना जाता रहा है कि लोहे की कड़ाही में बना &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1056" height="501" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/5-14.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/5-14.jpg 1056w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/5-14-768x364.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1056px) 100vw, 1056px"></p>
<p>आजकल हमारी रसोई में एक बड़ा और अच्छा बदलाव देखने को मिल रहा है। लोग मॉडर्न बर्तनों की जगह वापस अपने पुराने और पारंपरिक बर्तनों की तरफ लौट रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा चलन ‘लोहे की कड़ाही’ का बढ़ रहा है।</p>
<p>दादी-नानी के जमाने से माना जाता रहा है कि लोहे की कड़ाही में बना खाना न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होता है, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। आइए, दिल्ली के मैक्योर अस्पताल के कंसल्टेंट मेडिसिन, डॉ. प्रतीक कादयान से जानते हैं कि इस बात में कितनी सच्चाई है।</p>
<p><strong>आयरन की कमी को दूर करने में मददगार<br /></strong>जब हम लोहे की कड़ाही में खाना पकाते हैं, तो बर्तन से प्राकृतिक रूप से थोड़ी मात्रा में आयरन निकलकर हमारे भोजन में घुल जाता है। यह प्रक्रिया शरीर में आयरन की कमी को पूरा करने में काफी मदद कर सकती है। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद है, जिन्हें आयरन की कमी या एनीमिया का खतरा बना रहता है।</p>
<p>एक दिलचस्प बात यह भी है कि जब आप इस कड़ाही में टमाटर, इमली या कोई अन्य खट्टी चीजें डालकर खाना पकाते हैं, तो भोजन में आयरन की मात्रा थोड़ी और बढ़ जाती है।</p>
<p><strong>बेहतरीन स्वाद और शानदार मजबूती<br /></strong>लोहे की कड़ाही की एक बड़ी खासियत यह है कि यह हीट को बहुत लंबे समय तक अपने अंदर बनाए रखती है। इस वजह से इसमें खाना बहुत अच्छी तरह और समान रूप से पकता है। यही कारण है कि लोहे के बर्तन में बनी सब्जियां, पराठे और अन्य पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद दोगुना हो जाता है।</p>
<p>इतना ही नहीं, अगर मजबूती की बात करें तो लोहे की कड़ाही आजकल के नॉन-स्टिक बर्तनों की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूत और सालों-साल टिकने वाली होती है।</p>
<p><strong>क्या हर किसी के लिए फायदेमंद है?<br /></strong>डॉ. प्रतीक कादयान के अनुसार, आमतौर पर लोहे की कड़ाही में पकाना सेहतमंद है, लेकिन हर व्यक्ति को ज्यादा आयरन की जरूरत नहीं होती।</p>
<p>जिन लोगों के शरीर में पहले से ही आयरन की मात्रा जरूरत से ज्यादा है, या जो आयरन से जुड़ी किसी खास बीमारी या स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें लोहे के बर्तनों का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।</p>
<p><strong>कैसे करें लोहे की कड़ाही की सही देखभाल?<br /></strong>लोहे की कड़ाही का अगर सही तरीके से रखरखाव न किया जाए, तो यह खराब भी हो सकती है। इसलिए इसके इस्तेमाल में कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए:</p>
<p>सूखा रखें: इस्तेमाल करने और धोने के बाद कड़ाही को अच्छी तरह से सुखाना बहुत जरूरी है। अगर इसमें पानी या नमी रह गई, तो इसमें जंग लग सकती है।<br />तेल लगाएं: कड़ाही की क्वालिटी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए, समय-समय पर इसके अंदरूनी हिस्से में हल्का-सा तेल लगाकर इसे ‘ग्रीस’ करते रहना चाहिए।</p>
<p>लोहे की कड़ाही सिर्फ एक बर्तन नहीं, बल्कि सेहत और स्वाद का एक बेहतरीन तालमेल है। सही देखभाल और थोड़ी-सी सावधानी के साथ, यह आपकी रसोई का सबसे भरोसेमंद साथी बन सकती है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हड्डियों को मजबूत करने वाला विटामिन-D बन सकता है किडनी और दिल का दुश्मन</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 24 Jun 2026 06:35:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%b9%e0%a4%a1%e0%a5%8d%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a4%ac%e0%a5%82%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b5%e0%a4%be/</guid>

					<description><![CDATA[आजकल जरा-सी थकान या कमजोरी महसूस होते ही लोग तुरंत विटामिन-D के सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं। धूप में कम निकलना और बिगड़े हुए लाइफस्टाइल के कारण इन गोलियों का चलन काफी बढ़ गया है। यह बिल्कुल सच है कि हड्डियों की मजबूती, अच्छी इम्युनिटी और बेहतर सेहत के लिए विटामिन-D बहुत जरूरी है, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1047" height="502" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/2-15.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/2-15.jpg 1047w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/2-15-768x368.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1047px) 100vw, 1047px"></p>
<p>आजकल जरा-सी थकान या कमजोरी महसूस होते ही लोग तुरंत विटामिन-D के सप्लीमेंट्स लेना शुरू कर देते हैं। धूप में कम निकलना और बिगड़े हुए लाइफस्टाइल के कारण इन गोलियों का चलन काफी बढ़ गया है।</p>
<p>यह बिल्कुल सच है कि हड्डियों की मजबूती, अच्छी इम्युनिटी और बेहतर सेहत के लिए विटामिन-D बहुत जरूरी है, लेकिन क्या आपको पता है कि इसकी अधिकता आपकी सेहत के लिए बहुत बड़ा खतरा बन सकती है?</p>
<p>जी हां, जिस तरह विटामिन-D की कमी शरीर को नुकसान पहुंचाती है, उसी तरह बिना डॉक्टरी सलाह के इसके सप्लीमेंट्स का जरूरत से ज्यादा सेवन भी आपकी सेहत बिगाड़ सकता है। आइए, फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के कंसल्टेंट-नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. भानु मिश्रा से समझते हैं इस गंभीर खतरे के बारे में।</p>
<p><strong>Vitamin-D की ओवरडोज आखिर खतरनाक क्यों है?<br /></strong>जब हम अपनी मर्जी से सप्लीमेंट्स खाते हैं, तो शरीर में विटामिन-D का स्तर सामान्य से बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। मेडिकल भाषा में इसे ‘विटामिन-डी टॉक्सिसिटी’ या ‘हाइपरविटामिनोसिस डी’ कहा जाता है। एक बात हमेशा ध्यान रखें कि यह समस्या कभी भी धूप सेंकने या डाइट से नहीं होती, बल्कि केवल सप्लीमेंट्स की ओवरडोज से होती है।</p>
<p>विटामिन-D का मुख्य काम हमारे शरीर में कैल्शियम को सोखना है, लेकिन जब विटामिन-D हद से ज्यादा हो जाता है, तो शरीर में कैल्शियम का स्तर भी असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इस स्थिति को ‘हाइपरकैल्सीमिया’ कहते हैं और यही स्थिति कई गंभीर बीमारियों की जड़ है।</p>
<p><strong>इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज<br /></strong>विटामिन-D की ओवरडोज के लक्षण रातों-रात नहीं बल्कि धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए इन्हें पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। अगर आप सप्लीमेंट्स ले रहे हैं और आपको नीचे दी गई कोई भी समस्या महसूस हो रही है, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें:</p>
<p>थकान और मांसपेशियों में कमजोरी: कैल्शियम की अधिकता के कारण आपकी मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं और आप हमेशा थका हुआ महसूस करते हैं।<br />पेट की दिक्कतें और कब्ज: शरीर में बढ़ा हुआ कैल्शियम पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है। इससे जी मचलाना, उल्टी आना, पेट दर्द और कब्ज की शिकायत हो सकती है।<br />बार-बार पेशाब आना और बहुत ज्यादा प्यास: बढ़े हुए कैल्शियम को किडनी शरीर से बाहर निकालने की कोशिश करती है। इससे आपको बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी की कमी हो सकती है।<br />भूख और वजन में कमी: पाचन की समस्याओं और लगातार बीमार महसूस करने की वजह से भूख लगनी बंद हो सकती है, जिससे तेजी से वजन गिरने लगता है।<br />हड्डियों में दर्द: ज्यादा विटामिन-D हड्डियों को मजबूत करने के बजाय उनमें मौजूद कैल्शियम को ही बाहर निकालने लगता है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और दर्द रहने लगता है।<br />किडनी पर सीधा असर: कैल्शियम का स्तर लंबे समय तक ज्यादा रहे तो किडनी में पथरी बन सकती है। गंभीर मामलों में यह किडनी फेलियर का कारण भी बन सकता है।<br />दिल से जुड़ी बीमारियां: अगर स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाए, तो यह आपके दिल की धड़कन को भी प्रभावित कर सकता है।</p>
<p><strong>विटामिन-डी के ओवरडोज से कैसे बचें?<br /></strong>विटामिन-D की ओवरडोज से बचना बहुत आसान है, बस आपको इन जरूरी बातों का ध्यान रखना है:</p>
<p>डोज का सख्ती से पालन करें: डॉक्टर ने सप्लीमेंट्स की जो मात्रा और जितने दिनों का कोर्स तय किया है, केवल उतना ही लें। अपनी मर्जी से डोज बढ़ाने की गलती न करें।<br />बिना डॉक्टर से पूछे दवा न लें: अपनी मर्जी से कोई भी सप्लीमेंट न खाएं। सबसे पहले ब्लड टेस्ट करवाएं और डॉक्टर की सलाह लें। वे आपकी टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर सही डोज बताएंगे।<br />नेचुरल तरीकों को अपनाएं: अपने शरीर के लिए जरूरी विटामिन-D का ज्यादातर हिस्सा प्राकृतिक धूप से लेने की कोशिश करें। इसके अलावा अपनी डाइट में फैटी फिश, अंडे की जर्दी और फोर्टिफाइड दूध जैसी चीजों को शामिल करें।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आमरस या मैंगो शेक? गर्मियों में सेहत के लिए क्या है ज्यादा फायदेमंद</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%86%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%b8-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8b-%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 23 Jun 2026 12:30:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%86%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%b8-%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8b-%e0%a4%b6%e0%a5%87%e0%a4%95-%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b/</guid>

					<description><![CDATA[गर्मियों के मौसम में हर तरफ फलों के राजा ‘आम’ की बहार छाई रहती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आम का मजा लेने का सबसे हेल्दी तरीका क्या है- आमरस या मैंगो शेक? बता दें, कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट की कंसल्टेंट डाइटेटिक्स, वंदना राजपूत ने इस उलझन को सुलझाया है। आइए, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="924" height="554" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/6-21.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/6-21.jpg 924w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/6-21-768x460.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 924px) 100vw, 924px"></p>
<p>गर्मियों के मौसम में हर तरफ फलों के राजा ‘आम’ की बहार छाई रहती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आम का मजा लेने का सबसे हेल्दी तरीका क्या है- आमरस या मैंगो शेक?</p>
<p>बता दें, कैलाश हॉस्पिटल एंड न्यूरो इंस्टीट्यूट की कंसल्टेंट डाइटेटिक्स, वंदना राजपूत ने इस उलझन को सुलझाया है। आइए, इस आर्टिकल में समझते हैं कि न्यूट्रिशन एक्सपर्ट के अनुसार इन दोनों में से आपके लिए क्या ज्यादा बेहतर है।</p>
<p><strong>स्वाद और सेहत का खजाना है आमरस<br /></strong>आमरस एक पारंपरिक और बहुत ही साधारण विकल्प है। यह मुख्य रूप से पके हुए आम का गूदा होता है। इसका मतलब है कि आप आम का आनंद लगभग उसी रूप में ले रहे हैं, जैसा प्रकृति ने उसे बनाया है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट के अनुसार, आमरस के कई फायदे हैं:</strong></p>
<p>विटामिन्स से भरपूर: आम में प्राकृतिक रूप से विटामिन-ए और विटामिन-सी पाया जाता है।<br />इम्युनिटी बूस्टर: इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं।<br />असली स्वाद: चूंकि आमरस बहुत कम चीजों से बनता है, इसलिए इसमें आम का असली स्वाद और सारे पोषक तत्व बरकरार रहते हैं।<br />एक्सपर्ट की राय: अगर आप कुछ हल्का, रिफ्रेशिंग और सीधे फल के गुणों वाला विकल्प चाहते हैं, तो आमरस आपके लिए एकदम सही है।<br /><strong>भरपूर एनर्जी और प्रोटीन का सोर्स है मैंगो शेक<br /></strong>दूसरी तरफ, मैंगो शेक पीने के बाद पेट ज्यादा भरा-भरा महसूस होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें आम के साथ दूध भी मिलाया जाता है।</p>
<p><strong>मैंगो शेक पीने के मुख्य कारण:</strong></p>
<p>प्रोटीन का फायदा: दूध मिलाने से इसमें प्रोटीन जुड़ जाता है, जो आपको लंबे समय तक भूखा नहीं महसूस होने देता।<br />इंस्टेंट एनर्जी: यह ड्रिंक तेजी से एनर्जी देती है।<br />पोषण में इजाफा: कुछ लोग इसमें बादाम भी मिलाते हैं, जिससे शरीर को हेल्दी फैट्स और एक्स्ट्रा पोषण मिलता है।<br />एक्सपर्ट की राय: बढ़ते बच्चों, शारीरिक मेहनत करने वाले लोगों या दिन भर में तुरंत एनर्जी चाहने वालों के लिए मैंगो शेक एक बेहतरीन ऑप्शन है।</p>
<p><strong>चीनी से रहें सावधान<br /></strong>एक्सपर्ट एक बहुत ही जरूरी बात की तरफ ध्यान दिलाती हैं, जिस पर हम अक्सर गौर नहीं करते- इसमें मिलाई जाने वाली चीनी।</p>
<p>जी हां, पके हुए आम पहले से ही काफी मीठे होते हैं, इसलिए आमतौर पर इसमें अलग से चीनी डालने की कोई जरूरत नहीं होती है। अगर आप स्वाद के चक्कर में ज्यादा चीनी मिलाते हैं, तो गर्मियों का यह हेल्दी ड्रिंक बहुत जल्दी एक ‘हाई-कैलोरी डेजर्ट’ में बदल सकता है।</p>
<p><strong>तो फिर दोनों में से किसे चुनें?<br /></strong>सच तो यह है कि इसका कोई एक सही या गलत जवाब नहीं है। दोनों ही ड्रिंक्स आपकी संतुलित डाइट का हिस्सा आसानी से बन सकते हैं।</p>
<p>गर्मियां आम का प्राकृतिक मौसम है और सीमित मात्रा में खाने पर यह सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है। वंदना राजपूत की सलाह बिल्कुल सीधी और सरल है। वे कहती हैं, “इसे बनाने का तरीका साधारण रखें, एक्स्ट्रा चीनी मिलाने से बचें और इस फल में मौजूद प्राकृतिक गुणों का भरपूर आनंद लें।”</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>वेट लॉस के लिए सफेद चावल छोड़कर ब्राउन राइस खाना कितना सही है?</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%a6-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2-%e0%a4%9b%e0%a5%8b/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 22 Jun 2026 06:03:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%b5%e0%a5%87%e0%a4%9f-%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%b8%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%a6-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2-%e0%a4%9b%e0%a5%8b/</guid>

					<description><![CDATA[वेट लॉस जर्नी में अक्सर हम जिस चीज को सबसे पहले अपनी डाइट से बाहर करते हैं, वह है कार्बोहाइड्रेट और उसमें भी सबसे पहला नंबर आता है हमारे मनपसंद सफेद चावल का। जी हां, आज सोशल मीडिया और फिटनेस की दुनिया में यह बात फैल चुकी है कि अगर छरहरी काया पानी है, तो &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="895" height="603" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/1-31.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/1-31.jpg 895w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/1-31-768x517.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 895px) 100vw, 895px"></p>
<p>वेट लॉस जर्नी में अक्सर हम जिस चीज को सबसे पहले अपनी डाइट से बाहर करते हैं, वह है कार्बोहाइड्रेट और उसमें भी सबसे पहला नंबर आता है हमारे मनपसंद सफेद चावल का।</p>
<p>जी हां, आज सोशल मीडिया और फिटनेस की दुनिया में यह बात फैल चुकी है कि अगर छरहरी काया पानी है, तो सफेद चावल से दूरी बना लें और उसकी जगह ब्राउन राइस को अपनी थाली में शामिल करें।</p>
<p>हालांकि, क्या वजन घटाने का यह फॉर्मूला वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सही है? फरीदाबाद के एशियन अस्पताल की हेड डायटीशियन, कोमल मलिक के नजरिए से आइए समझते हैं इस दावे की असली सच्चाई।</p>
<p><strong>सफेद चावल और ब्राउन राइस में क्या है फर्क?<br /></strong>मेडिकल साइंस के अनुसार, इन दोनों चावलों में सबसे बड़ा अंतर इनकी प्रोसेसिंग का होता है। जब खेत से धान आता है, तो ब्राउन राइस में उसकी बाहरी परतें- ब्रान और जर्म बरकरार रहती हैं। ब्रान में जहां खूब सारा फाइबर होता है, वहीं जर्म विटामिंस और मिनरल्स का खजाना है।</p>
<p>जब इसी ब्राउन राइस को मशीनों में डालकर पॉलिश किया जाता है, तो ये दोनों पौष्टिक परतें हट जाती हैं। इसके बाद जो सफेद हिस्सा बचता है, उसे ही हम ‘सफेद चावल’ कहते हैं।</p>
<p><strong>इन दोनों के बीच तीन बड़े अंतर हैं:<br /></strong>फाइबर का खजाना: सफेद चावल की तुलना में ब्राउन राइस में लगभग 2 से 3 गुना ज्यादा फाइबर पाया जाता है।<br />ग्लाइसेमिक इंडेक्स: सफेद चावल का जीआई ज्यादा (लगभग 70-75) होता है, जो खून में शुगर के स्तर को तेजी से बढ़ाता है। इसके विपरीत ब्राउन राइस का जीआई (50-55) मध्यम होता है, जिससे शरीर को धीरे-धीरे एनर्जी मिलती है।<br />पोषक तत्वों की ताकत: ब्राउन राइस में सफेद चावल के मुकाबले मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और बी-विटामिन्स कहीं ज्यादा मात्रा में होते हैं।</p>
<p><strong>क्या ब्राउन राइस खाने से जादू की तरह कम होगा वजन?<br /></strong>डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि वजन घटाने के लिए सबसे जरूरी नियम कैलोरी डेफिसिट है। अगर कैलोरी की बात करें, तो एक कटोरी सफेद चावल और ब्राउन राइस के बीच का अंतर बहुत ही मामूली, लगभग 10-20 कैलोरी होता है। इसलिए, केवल ब्राउन राइस खाना शुरू कर देने से आपका वजन रातों-रात कम नहीं हो जाएगा।</p>
<p>हालांकि, ब्राउन राइस दो तरीकों से वजन घटाने में आपकी मदद जरूर करता है:</p>
<p>देर तक पेट भरा रखना: इसमें मौजूद फाइबर को पचने में समय लगता है। इसलिए इसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती और आप अनहेल्दी स्नैकिंग से बच जाते हैं।<br />ब्लड शुगर कंट्रोल: कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स होने के कारण यह शरीर में इंसुलिन को अचानक से नहीं बढ़ने देता। इंसुलिन का स्थिर रहना फैट घटाने के लिए एक बहुत अच्छी स्थिति पैदा करता है।</p>
<p><strong>क्या सफेद चावल को पूरी तरह ‘विलेन’ मान लें?<br /></strong>बिल्कुल नहीं! अगर आप सफेद चावल खाने के सही तरीके को समझ लें, तो यह आपके फिटनेस के सफर में कोई रुकावट नहीं डालेगा।</p>
<p>डॉक्टर की सलाह यह है कि चावल को अकेला खाने के बजाय उसे ‘कंट्रोल’ करें। अगर आप सफेद चावल को ढेर सारी हरी सब्जियों और दाल या प्रोटीन के साथ मिलाकर खाते हैं, तो आपकी पूरी मील का ग्लाइसेमिक इंडेक्स खुद-ब-खुद कम हो जाता है। यह शानदार कॉम्बिनेशन आपके मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है।</p>
<p>इसके अलावा, सफेद चावल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे पचाना बेहद आसान होता है। जिन लोगों को अक्सर गैस, ब्लोटिंग या पाचन की समस्या रहती है, उनके लिए ब्राउन राइस का भारी फाइबर पचाना कई बार मुश्किल हो सकता है।</p>
<p><strong>एक्सपर्ट की सलाह<br /></strong>किन्हें खाना चाहिए ब्राउन राइस: अगर आप डायबिटीज, पीसीओडी जैसी समस्याओं या गंभीर मोटापे से परेशान हैं, तो सफेद चावल की जगह डाइट में ब्राउन राइस, बाजरा या क्विनोआ को शामिल करना आपके लिए एक बेहतरीन मेडिकल चॉइस होगी।<br />स्वस्थ लोगों के लिए नियम: अगर आप एक सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति हैं, जिनका मकसद सिर्फ वजन को संतुलित रखना है, तो आपको सफेद चावल से पूरी तरह तौबा करने की कोई जरूरत नहीं है।</p>
<p>वजन घटाने का सबसे बड़ा और असली मंत्र है ‘पोर्शन कंट्रोल’ यानी सही मात्रा में खाना। दो प्लेट भरकर ब्राउन राइस खाने से लाख गुना बेहतर है कि आप आधी कटोरी सफेद चावल को ढेर सारी सब्जियों और प्रोटीन के साथ मजे से खाएं।</p>
<p>सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस को अपनाना सेहत के लिए एक अच्छा कदम जरूर है, लेकिन वजन कम करने का यह इकलौता रास्ता नहीं है। आखिर में जीत इसी बात की होती है कि आपकी पूरी डाइट कैसी है और आप दिन भर में कितनी कैलोरी ले रहे हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>चुपके-चुपके आपकी किडनी को डैमेज कर रही हैं रोजमर्रा की ये आदतें</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 21 Jun 2026 06:23:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%8b/</guid>

					<description><![CDATA[हमारे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने का काम किडनी करती है। शरीर का कचरा बाहर निकालने के साथ-साथ ये शरीर का बॉडी फ्लूएड बैलेंस भी बनाकर रखती है। हालांकि, हमारी आज की लाइफस्टाइल में कई ऐसी आदतें शामिल हैं, जो हमारी किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं। खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में किडनी डैमज &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="870" height="422" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/1-30.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/1-30.jpg 870w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/1-30-768x373.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 870px) 100vw, 870px"></p>
<p>हमारे शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने का काम किडनी करती है। शरीर का कचरा बाहर निकालने के साथ-साथ ये शरीर का बॉडी फ्लूएड बैलेंस भी बनाकर रखती है। हालांकि, हमारी आज की लाइफस्टाइल में कई ऐसी आदतें शामिल हैं, जो हमारी किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं।</p>
<p>खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में किडनी डैमज के लक्षण साफ नजर नहीं आते। इसलिए बीमारी चुपके-चुपके बढ़ती रहती है। इसलिए जरूरी है कि आप उन आदतों में सुधार करें, जो आपकी किडनी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती हैं। आइए जानें इन आदतों के बारे में।</p>
<p><strong>किडनी को नुकसान पहुंचाती हैं ये आदतें<br /></strong>भरपूर मात्रा में पानी न पीना- किडनी को स्वस्थ रखने के लिए शरीर में पानी का सही स्तर होना जरूरी है। कम पानी पीने से टॉक्सिन्स शरीर में जमा होने लगते हैं, जिससे किडनी पर एक्स्ट्रा प्रेशर पड़ता है। लंबे समय तक यह आदत किडनी फेल्योर का कारण भी बन सकती है।<br />ज्यादा नमक खाना- ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है और यह किडनी की ब्लड वेसल्स को प्रभावित करता है। धीरे-धीरे यह किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को कम कर देता है।<br />ज्यादा पेनकिलर लेना- सिरदर्द या बॉडी पेन होने पर बार-बार पेनकिलर लेना सामान्य लगता है, लेकिन इन दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल किडनी को सीधा नुकसान पहुंचाता है।<br />पूरी नींद न लेना- रात में ठीक से नींद न लेने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ जाते हैं, जो ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं। यह स्थिति किडनी पर भी दबाव डालती है।<br />ज्यादा जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड- मार्केट के प्रोसेस्ड स्नैक्स, फ्राइड आइटम और पैकेज्ड फूड में प्रिजरवेटिव्स और नमक की मात्रा ज्यादा होती है। इनका लगातार सेवन किडनी की काम करने की क्षमता को कम कर देता है।<br />ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को इग्नोर करना- डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी रोग के सबसे बड़े कारण हैं। इन्हें कंट्रोल न करने से किडनी पर धीरे-धीरे गंभीर असर पड़ता है।<br />ज्यादा प्रोटीन लेना- प्रोटीन हेल्दी है, लेकिन जरूरत से ज्यादा प्रोटीन लेने से किडनी पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है। यह आदत लंबे समय में किडनी को कमजोर कर देती है।<br />स्मोकिंग और अल्कोहल- सिगरेट और शराब किडनी के सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे किडनी फंक्शन धीरे-धीरे कमजोर होता है और शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालने की क्षमता घट जाती है।</p>
<p>किडनी की देखभाल करना उतना मुश्किल नहीं है, जितना हम सोचते हैं। थोड़ी सजगता और सही लाइफस्टाइल अपनाकर हम इसे लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं। भरपूर मात्रा में पानी पिएं, हेल्दी डाइट लें, नींद पूरी करें और दवाइयों या नशे से बचें।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>नींद की कमी से कमजोर हो रहा है दिमाग का ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 20 Jun 2026 06:29:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%95%e0%a4%ae%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a5%8b-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be/</guid>

					<description><![CDATA[हम सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए एक सुकून भरी नींद लेना कितना जरूरी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ठीक से न सो पाना आपके दिमाग को कितनी गहराई तक नुकसान पहुंचा सकता है? हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नींद में बार-बार &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="853" height="503" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/5-11.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/5-11.jpg 853w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/5-11-768x453.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 853px) 100vw, 853px"></p>
<p>हम सभी जानते हैं कि अच्छी सेहत के लिए एक सुकून भरी नींद लेना कितना जरूरी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ठीक से न सो पाना आपके दिमाग को कितनी गहराई तक नुकसान पहुंचा सकता है?</p>
<p>हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नींद में बार-बार खलल पड़ने से हमारे दिमाग के ‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ को भारी नुकसान पहुंचता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह रिसर्च क्या कहती है।</p>
<p><strong>दिमाग का ‘सिक्योरिटी गार्ड’ है ब्लड-ब्रेन बैरियर<br /></strong>‘ब्लड-ब्रेन बैरियर’ को आप अपने दिमाग का एक बेहद चुस्त सिक्योरिटी गार्ड या एक खास फिल्टर मान सकते हैं। यह दिमाग की रक्त वाहिकाओं के चारों ओर कोशिकाओं की एक परत होती है।</p>
<p><strong>इसका काम क्या है?<br /></strong>यह बहुत ही चुनिंदा चीजों को ही अंदर जाने देता है। यह दिमाग तक जरूरी ऑक्सीजन और पोषक तत्व तो पहुंचाता है, लेकिन खतरनाक बैक्टीरिया, विषैले पदार्थों और ज्यादातर दवाइयों को बाहर ही रोक देता है। इस तरह यह हमारे दिमाग को गंभीर नुकसान से बचाता है।</p>
<p><strong>नींद में खलल पड़ने से क्या होता है असर?<br /></strong>‘लैबमेड डिस्कवरी’ पत्रिका में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक, जब हमारी नींद पूरी नहीं होती या उसमें बाधा आती है, तो इस बैरियर को नुकसान पहुंचता है। शंघाई जिओ टोंग यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने बताया है कि इस बैरियर के डैमेज होने का सीधा संबंध हमारी सोचने-समझने की क्षमता में कमी से है। इसके कारण अल्जाइमर जैसी बीमारी और दिमाग की नसों को प्रभावित करने वाली कई अन्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।</p>
<p><strong>कैसे कमजोर पड़ता है यह बैरियर?<br /></strong>शोधकर्ताओं ने बताया कि जब ब्लड-ब्रेन बैरियर को नुकसान पहुंचता है, तो दो मुख्य परेशानियां होती हैं:</p>
<p>बढ़ी हुई पारगम्यता: कोशिकाओं के बीच की जगह से पानी, आयन और छोटे अणुओं की आवाजाही जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है।<br />सफाई में रुकावट: दिमाग से बेकार पदार्थों को बाहर निकालने की प्रक्रिया में बाधा आती है।<br />इस नुकसान के पीछे मुख्य रूप से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, न्यूरोइन्फ्लेमेशन और आंत के माइक्रोबायोम का असंतुलन जैसे कारण शामिल पाए गए हैं।</p>
<p><strong>सोने-जागने का बिगड़ा हुआ चक्र भी है जिम्मेदार<br /></strong>हमारे शरीर की एक अपनी घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहते हैं। जब सोने और जागने के इस प्राकृतिक चक्र का तालमेल बिगड़ जाता है, तो यह भी ब्लड-ब्रेन बैरियर को तोड़ने का काम करता है। इसके अलावा, नींद से जुड़ी एक खास बीमारी- ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया के कारण भी इस बैरियर को नुकसान पहुंचने के प्रमाण मिले हैं।</p>
<p><strong>याददाश्त पर सीधा असर<br /></strong>दिमाग का वह हिस्सा जो हमारी याददाश्त से जुड़ा होता है, उसे ‘हिप्पोकैंपस’ कहते हैं। अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अगर हिप्पोकैंपस में ब्लड-ब्रेन बैरियर टूटता है, तो यह साफ तौर पर हमारी याद रखने और सोचने-समझने की क्षमता में कमी का संकेत हो सकता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महिलाओं और पुरुषों के शरीर में बीमारी से लड़ने की क्षमता क्यों होती है अलग?</title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 19 Jun 2026 06:27:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%82-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80/</guid>

					<description><![CDATA[क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई बीमारी आती है या उम्र बढ़ती है, तो पुरुषों और महिलाओं का शरीर एक ही स्थिति में अलग-अलग तरीके से क्यों प्रतिक्रिया देता है? हाल ही में हुए एक नए शोध ने इस बड़े सवाल का जवाब ढूंढ लिया है। इसका असली कारण हमारे शरीर में मौजूद &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1102" height="624" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/5-10.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/5-10.jpg 1102w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/5-10-768x435.jpg 768w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/5-10-390x220.jpg 390w" sizes="auto, (max-width: 1102px) 100vw, 1102px"></p>
<p>क्या आपने कभी सोचा है कि जब कोई बीमारी आती है या उम्र बढ़ती है, तो पुरुषों और महिलाओं का शरीर एक ही स्थिति में अलग-अलग तरीके से क्यों प्रतिक्रिया देता है? हाल ही में हुए एक नए शोध ने इस बड़े सवाल का जवाब ढूंढ लिया है।</p>
<p>इसका असली कारण हमारे शरीर में मौजूद एक खास प्रोटीन है, जिसे ‘एसआइआरटी 7’ कहा जाता है। यह प्रोटीन मुख्य रूप से हमारे जीन की सुरक्षा करता है और उसकी गतिविधियों को कंट्रोल करता है।</p>
<p><strong>वैज्ञानिक क्या कह रहे हैं?<br /></strong>अमेरिका के ‘मैस जनरल ब्रिघम’ और स्पेन के ‘जोसेप कैरेरास ल्यूकेमिया इंस्टीट्यूट’ के शोधकर्ताओं ने इस विषय पर गहराई से स्टडी की है। विशेषज्ञों के अनुसार, बीमारी के बढ़ने या शरीर के बूढ़े होने की प्रक्रिया में लिंग के आधार पर होने वाले बदलावों के पीछे के जैविक कारणों को अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है। इन्हीं कारणों और अंतरों को बेहतर ढंग से समझने के लिए वैज्ञानिक अब सेक्स क्रोमोसोम की बारीकी से जांच कर रहे हैं।</p>
<p><strong>‘एसआइआरटी 7’ प्रोटीन का क्या काम है?<br /></strong>प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका ‘नेचर’ में प्रकाशित इस स्टडी से एक अहम खुलासा हुआ है। ‘एसआइआरटी 7’ एक ऐसा प्रोटीन है जो तनाव और उम्र बढ़ने पर हमारे शरीर की कोशिकाओं के रिएक्शन को संभालता है। शोध में पता चला है कि यह प्रोटीन हमारे एक्स क्रोमोसोम के स्वास्थ्य को बनाए रखने में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।</p>
<p><strong>एक्स क्रोमोसोम का पूरा गणित<br /></strong>किसी भी इंसान का जैविक लिंग तय करने वाले दो सेक्स क्रोमोसोम होते हैं, जिनमें से एक एक्स क्रोमोसोम है।</p>
<p>महिलाओं में: आमतौर पर दो एक्स क्रोमोसोम (XX) पाए जाते हैं।<br />पुरुषों में: एक एक्स और एक वाई क्रोमोसोम (XY) होता है।</p>
<p>इस शोध में सामने आया है कि महिलाओं की कोशिकाओं में जीन की एक्टिविटी को संतुलित रखने के लिए शरीर आमतौर पर एक एक्स क्रोमोसोम को इनएक्टिव कर देता है। यही क्रोमोसोम और ‘एसआइआरटी 7’ प्रोटीन का तालमेल महिलाओं और पुरुषों की स्वास्थ्य प्रतिक्रियाओं में बड़ा अंतर पैदा करता है।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>क्या आपको भी होता है किडनी के पास दर्द? </title>
		<link>https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%a8%e0%a5%80/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 18 Jun 2026 06:30:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[सेहत]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://bharatkitasveer.com/%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%aa%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ad%e0%a5%80-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%a1%e0%a4%a8%e0%a5%80/</guid>

					<description><![CDATA[किडनी कैंसर और किडनी स्टोन दोनों ही किडनी से जुड़ी बीमारियां हैं। हालांकि, ये दोनों बिल्कुल अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन इनके कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। इसी वजह से बिना डॉक्टरी जांच के इनमें फर्क कर पाना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है। एंड्रोमेडा कैंसर अस्पताल की कंसल्टेंट (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) डॉ. पर्ल &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div><img loading="lazy" width="1073" height="549" src="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/3-19.jpg" class="webfeedsFeaturedVisual wp-post-image" alt="" style="display: block; margin: auto; margin-bottom: 5px;max-width: 100%;" link_thumbnail="" decoding="async" srcset="https://bharatkitasveer.com/wp-content/uploads/2026/06/3-19.jpg 1073w, https://amarrashtra.com/wp-content/uploads/2026/06/3-19-768x393.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1073px) 100vw, 1073px"></p>
<p>किडनी कैंसर और किडनी स्टोन दोनों ही किडनी से जुड़ी बीमारियां हैं। हालांकि, ये दोनों बिल्कुल अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन इनके कुछ लक्षण एक जैसे हो सकते हैं। इसी वजह से बिना डॉक्टरी जांच के इनमें फर्क कर पाना कई बार बहुत मुश्किल हो जाता है।</p>
<p>एंड्रोमेडा कैंसर अस्पताल की कंसल्टेंट (रेडिएशन ऑन्कोलॉजी) डॉ. पर्ल आनंद के अनुसार, इन दोनों बीमारियों के अंतर को समझना बेहद जरूरी है, ताकि समय रहते सही इलाज मिल सके। आइए, आज World Kidney Cancer Day के मौके पर जानते हैं कि आप किडनी स्टोन और किडनी कैंसर के बीच का फर्क कैसे पहचान सकते हैं।</p>
<p><strong>किडनी स्टोन क्या है और कैसे दिखते हैं इसके लक्षण?<br /></strong>किडनी स्टोन असल में मिनरल्स और नमक के ठोस टुकड़े होते हैं, जो किडनी के अंदर बन जाते हैं।</p>
<p>जब किसी को पथरी होती है, तो उसे पीठ, कमर के साइड में या पेट के निचले हिस्से में अचानक और बहुत तेज दर्द होता है। यह दर्द लहरों की तरह आता-जाता रहता है। इसके अलावा कुछ और लक्षण भी दिख सकते हैं, जैसे:</p>
<p>जी मिचलाना और उल्टी आना।<br />पेशाब करते समय जलन महसूस होना।<br />पेशाब में खून आना।</p>
<p>अगर पथरी छोटी है, तो वह अक्सर अपने आप पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है, लेकिन बड़ी पथरी के लिए मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत पड़ती है।</p>
<p><strong>किडनी कैंसर कैसे अलग है?<br /></strong>दूसरी तरफ, किडनी कैंसर तब होता है जब किडनी में असामान्य कोशिकाएं अनियंत्रित होकर तेजी से बढ़ने लगती हैं।</p>
<p>सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि शुरुआती स्टेज में किडनी कैंसर का कोई भी लक्षण दिखाई नहीं देता। कई बार तो इसका पता अचानक तब चलता है, जब किसी और वजह से इमेजिंग टेस्ट करवाए जाते हैं। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, ये लक्षण सामने आ सकते हैं:</p>
<p>पेशाब में खून आना।<br />कमर के साइड या पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द रहना।<br />बिना किसी कारण के वजन कम होना।<br />बहुत ज्यादा थकान और बुखार रहना।<br />पेट में किसी गांठ का महसूस होना।</p>
<p><strong>दर्द से समझें दोनों के बीच का सबसे बड़ा अंतर<br /></strong>अगर आप कन्फ्यूज हैं, तो ‘दर्द का तरीका’ दोनों के बीच एक बहुत बड़ा अंतर बता सकता है:</p>
<p>पथरी का दर्द: यह एकदम अचानक उठता है, बहुत तेज होता है और रुक-रुक कर आता है।<br />कैंसर का दर्द: यह दर्द हल्का, लेकिन लगातार बना रहता है, और समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।</p>
<p>यह सच है कि पेशाब में खून दोनों ही बीमारियों में आ सकता है, लेकिन अगर इसके साथ बिना किसी कारण के तेजी से वजन गिर रहा है और लगातार थकान बनी हुई है, तो यह कैंसर का इशारा हो सकता है।</p>
<p><strong>सही जांच है बेहद जरूरी<br /></strong>चूंकि दोनों बीमारियों के कई लक्षण आपस में मिलते-जुलते हैं, इसलिए अगर आपको पेशाब से जुड़ी कोई भी लगातार बनी रहने वाली समस्या हो या पेशाब में खून दिखे, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।</p>
<p>डॉक्टर सही बीमारी का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड, सीटी स्कैन और लेबोरेटरी टेस्ट की मदद लेते हैं। सही जांच के बाद ही वह आपको एक सही इलाज की सलाह दे सकते हैं।</p>
</div>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
