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	<title>Uncategorized &#8211; Bharat Ki Tasveer</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Fri, 11 Sep 2026 09:37:13 +0000</lastBuildDate>
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		<title>Crude Oil में उछाल, WTI 100 डॉलर और Brent 105 डॉलर प्रति बैरल के पार</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:37:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिलने के बीच अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत बृहस्पतिवार को मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। अमेरिकी कच्चे तेल का प्रमुख बेंचमार्क &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिलने के बीच अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत बृहस्पतिवार को मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय मानक माने जाने वाले ब्रेंट क्रूड की कीमत भी 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। अमेरिकी कच्चे तेल का प्रमुख बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) है, जबकि ब्रेंट को वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमत के प्रमुख मानक के रूप में देखा जाता है। इस बीच, अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट के संकेत मिले। एसएंडपी 500 के वायदा कारोबार में 0.5 प्रतिशत और नैस्डैक में 1.1 प्रतिशत की गिरावट रही। एक रिपोर्ट में बताया गया कि अमेरिका में थोक स्तर पर मुद्रास्फीति अब भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। उधर, यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ईसीबी) ने यूरोपीय संघ में मुद्रास्फीति पर काबू पाने के प्रयासों के तहत अपनी नीतिगत ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की। इसके बाद यूरोप के शेयर बाजारों में भी गिरावट रही। जर्मनी का डैक्स सूचकांक 0.7 प्रतिशत नीचे रहा।</p>
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		<title>नीब करोरी बाबा के भक्तों के लिए बड़ी सौगात, बनेगा आध्यात्मिक सर्किट; UPSTDC ने लॉन्च किए 5 खास टूर पैकेज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:36:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म/अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[श्रद्धेय संत नीब करोरी बाबा की आध्यात्मिक विरासत को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बाबा के जीवन और साधना से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़कर ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ विकसित किया जा रहा है। महासमाधि दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>श्रद्धेय संत नीब करोरी बाबा की आध्यात्मिक विरासत को देश-दुनिया के श्रद्धालुओं तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। बाबा के जीवन और साधना से जुड़े प्रमुख स्थलों को जोड़कर ‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ विकसित किया जा रहा है। महासमाधि दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने श्रद्धालुओं के लिए बाबा के नाम से पांच विशेष टूर पैकेज भी शुरू किए हैं। दिल्ली और लखनऊ से संचालित होने वाले इन पैकेजों में दो, तीन और पांच दिन की यात्राएं शामिल हैं।<br />
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि नीब करोरी बाबा की आस्था, सादगी और सेवा की विरासत आज भी देश-विदेश के लोगों को प्रेरित करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बाबा से जुड़े स्थलों को संरक्षित करने के साथ उनकी पर्यटन क्षमता विकसित कर रही है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। फिरोजाबाद के अकबरपुर को बाबा नीब करोरी की जन्मस्थली के रूप में विकसित किया जा रहा है। परियोजना के पहले चरण में पर्यटन सुविधाओं पर 8.65 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। दूसरे चरण की 2.22 करोड़ रुपये की परियोजना का 60 प्रतिशत से अधिक काम पूरा हो चुका है और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है। अकबरपुर में 55.44 लाख रुपये की ग्रामीण पर्यटन परियोजना भी जल्द शुरू की जाएगी। फर्रुखाबाद स्थित नीब करोरी आश्रम के विकास की 1.51 करोड़ रुपये की परियोजना पूरी हो चुकी है। यहां यात्रियों के ठहरने के लिए भवन, मुख्य द्वार और सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। अकबरपुर में बहुद्देशीय सभागार, सांस्कृतिक ब्लॉक, बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित प्रदर्शनी हॉल, डाइनिंग हॉल, 50 क्षमता की कैफेटेरिया, रसोई, शौचालय और करीब 60 लोगों के ठहरने के लिए डॉरमेट्री विकसित की जा रही है।<br />
जन्मस्थली से महासमाधि स्थल तक जुड़ेगा सफर<br />
‘नीब करोरी बाबा सर्किट’ में वृंदावन स्थित समाधि मंदिर, फिरोजाबाद का अकबरपुर गांव, फर्रुखाबाद का नीब करोरी बाबा आश्रम धाम मंदिर और लखनऊ का हनुमान सेतु मंदिर शामिल हैं। इस तरह बाबा की जन्मस्थली से लेकर साधना स्थल और महासमाधि स्थल तक जुड़े प्रमुख स्थानों को एक पर्यटन मार्ग में लाने का प्रयास किया जा रहा है।</p>
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		<title>लखनऊ मेट्रो के कॉरिडोर-1बी को रफ्तार, कानपुर के नौबस्ता खंड को मिली मंजूरी; आगरा में भी काम तेज</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:35:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अगर आप लखनऊ, कानपुर या आगरा में रोजाना बस, ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन से सफर करते हैं, तो मेट्रो से जुड़ा यह अपडेट आपके लिए खास है। उत्तर प्रदेश के इन तीन बड़े शहरों में मेट्रो परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। इससे आने वाले समय में लोगों को बेहतर सार्वजनिक &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अगर आप लखनऊ, कानपुर या आगरा में रोजाना बस, ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहन से सफर करते हैं, तो मेट्रो से जुड़ा यह अपडेट आपके लिए खास है। उत्तर प्रदेश के इन तीन बड़े शहरों में मेट्रो परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है। इससे आने वाले समय में लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन, आसान कनेक्टिविटी और सफर में समय की बचत की उम्मीद है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने गुरुवार को प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप की बैठक में लखनऊ, कानपुर और आगरा मेट्रो सहित प्रमुख अवस्थापना परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को लंबित काम तेजी से पूरा करने और तय समयसीमा के साथ गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए।<br />
लखनऊ वालों के लिए क्या बदलेगा?<br />
लखनऊ मेट्रो के कॉरिडोर-1बी से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम आगे बढ़ चुके हैं। बैठक में बताया गया कि डिटेल्ड डिजाइन कंसल्टेंट, मेट्रो डिपो, एलिवेटेड सेक्शन और लिफ्ट के टेंडर अवार्ड किए जा चुके हैं। भूमिगत सेक्शन के तकनीकी मूल्यांकन की प्रक्रिया जारी है। वहीं, PSD, टेलीकॉम और AFC E&amp;M सिस्टम से जुड़े टेंडर वित्तीय स्वीकृति के बाद फ्लोट किए जा चुके हैं। आम यात्रियों के लिए इसका मतलब है कि शहर में मेट्रो कनेक्टिविटी के विस्तार से आगे चलकर रोज के आवागमन के लिए सार्वजनिक परिवहन का एक और विकल्प मजबूत होगा। खासकर नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए रोज सफर करने वालों को इसका फायदा मिल सकता है।<br />
कानपुर में नौबस्ता तक मेट्रो की राह आसान<br />
कानपुर में मेट्रो परियोजना ने भी महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। कॉरिडोर-1 में झकरकट्टी-ट्रांसपोर्ट नगर के दो भूमिगत स्टेशनों का काम 99 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं बारादेवी-नौबस्ता खंड के पांच एलिवेटेड स्टेशनों का निर्माण 100 प्रतिशत पूरा बताया गया है। कानपुर सेंट्रल को छोड़कर कानपुर सेंट्रल-नौबस्ता खंड को 5 जुलाई 2026 को सीएमआरएस की मंजूरी भी मिल चुकी है। इसका सीधा संबंध उन यात्रियों से है जिन्हें शहर के इस हिस्से से आने-जाने में सड़क यातायात पर निर्भर रहना पड़ता है। मेट्रो नेटवर्क बढ़ने पर सड़क पर वाहनों का दबाव कम करने और रोजाना के सफर को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है।<br />
कानपुर के दूसरे कॉरिडोर का भी काम आगे<br />
कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 में रावतपुर-डबल पुलिया खंड की सुरंग का निर्माण पूरा हो चुका है और इसकी भौतिक प्रगति 87.15 प्रतिशत बताई गई है। वहीं, सीएसए और विजय नगर से बर्रा-8 खंड की प्रगति 65 प्रतिशत तक पहुंच गई है। यानी कानपुर में मेट्रो नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में आगे बढ़ाने का काम जारी है, जिसका मकसद शहर के ज्यादा इलाकों को तेज सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना है।<br />
आगरा में भी मेट्रो का काम तेजी से आगे<br />
आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-1 के शेष भूमिगत हिस्से का संरचनात्मक काम पूरा हो चुका है। अब फिनिशिंग का काम चल रहा है और सीएमआरएस निरीक्षण भी पूरा हो चुका है। एलिवेटेड हिस्से में आईएसबीटी स्टेशन का निर्माण पूरा हो गया है, जबकि दो अन्य स्टेशनों पर काम जारी है। कॉरिडोर-2 में आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक 14 एलिवेटेड स्टेशनों और वायाडक्ट का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है। आगरा में मेट्रो का विस्तार स्थानीय लोगों के साथ-साथ शहर में आने वाले पर्यटकों के लिए भी अहम है। बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होने से प्रमुख इलाकों के बीच आवागमन आसान हो सकता है।<br />
चिल्ला रेगुलेटर-महामाया फ्लाईओवर भी रफ्तार पर<br />
गौतमबुद्धनगर की चिल्ला रेगुलेटर-महामाया फ्लाईओवर एलीवेटेड रोड परियोजना की भी समीक्षा की गई। इसकी भौतिक प्रगति 65.50 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 54.96 प्रतिशत बताई गई है। परियोजना का पहला माइलस्टोन दिसंबर में हासिल किया जा चुका है। एलीवेटेड रोड जैसी परियोजनाएं भी रोजाना सड़क से सफर करने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका उद्देश्य प्रमुख मार्गों पर यातायात के दबाव को कम करना और कनेक्टिविटी बेहतर करना है।<br />
सिर्फ मेट्रो नहीं, रोजगार योजना पर भी जोर<br />
बैठक में प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि 76 प्रतिशत पात्र प्रतिष्ठान पंजीकरण करा चुके हैं। मुख्य सचिव ने बाकी पात्र प्रतिष्ठानों का पंजीकरण कराने और योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। पात्र प्रतिष्ठानों को पंजीकरण प्रक्रिया में सहयोग देने पर भी जोर दिया गया।<br />
आम लोगों के लिए सबसे बड़ी बात क्या?<br />
लखनऊ, कानपुर और आगरा की इन परियोजनाओं का असर केवल सरकारी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। मेट्रो नेटवर्क का विस्तार मतलब रोज दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, कॉलेज जाने वाले छात्र, कारोबार के लिए सफर करने वाले लोग और शहर में आने-जाने वाले यात्रियों के लिए परिवहन के ज्यादा विकल्प। अगर परियोजनाएं तय समय पर पूरी होती हैं, तो लोगों को लंबी दूरी के सफर में सुविधा मिलने के साथ सड़क यातायात पर निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। यही वजह है कि इन परियोजनाओं की प्रगति आम शहरवासियों के लिए सीधे मायने रखती है।</p>
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		<title>US Open में Zverev का शानदार प्रदर्शन, Karen Khachanov से होगी खिताबी भिड़ंत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:34:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[न्यूयॉर्क में यूएस ओपन के मुकाबले जैसे-जैसे अंतिम दौर में पहुंच रहे हैं, दावेदारों के बीच मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष सिंगल्सके सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड के बोटिक वान डे जैंडशुल्प को 6-2, 7-5, &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>न्यूयॉर्क में यूएस ओपन के मुकाबले जैसे-जैसे अंतिम दौर में पहुंच रहे हैं, दावेदारों के बीच मुकाबला और दिलचस्प होता जा रहा है। जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पुरुष सिंगल्सके सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। उन्होंने क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड के बोटिक वान डे जैंडशुल्प को 6-2, 7-5, 6-1 से हराया। आर्थर ऐश स्टेडियम में रात के सत्र में खेले गए मुकाबले में ज्वेरेव शुरुआत से ही नियंत्रण में नजर आए। उन्होंने पहले सेट में आसानी से बढ़त बनाई और दूसरे सेट में भी दबाव बनाए रखा। तीसरे सेट में जर्मन खिलाड़ी ने कोई मौका नहीं दिया और मुकाबला सीधे तीन सेटों में अपने नाम कर लिया। खास बात यह है कि ज्वेरेव इस मुकाबले से पहले पूरी रात आराम नहीं कर पाए थे। उन्होंने बताया कि वह बेन शेल्टन और मौजूदा चैंपियन कार्लोस अल्काराज के बीच खेले गए रोमांचक क्वार्टर फाइनल को देर रात तक देखते रहे। यह मुकाबला स्थानीय समयानुसार बुधवार सुबह 3 बजकर 34 मिनट पर खत्म हुआ था, जो यूएस ओपन के इतिहास में सबसे देर से समाप्त होने वाला मुकाबला बन गया। ज्वेरेव ने बताया कि उन्होंने मुकाबला करीब साढ़े तीन बजे तक देखा और उसके बाद सोने नहीं गए। उन्होंने कहा कि उन्हें पता था कि वैसे भी वह दोपहर करीब एक बजे तक सोने वाले थे, इसलिए देर रात तक मैच देखने का फैसला किया। दिलचस्प बात यह भी है कि इस टूर्नामेंट में खुद ज्वेरेव के शुरुआती तीन मुकाबले देर रात खत्म हुए थे। उनके शुरुआती मैच क्रमशः रात 1 बजकर 55 मिनट, 2 बजकर 15 मिनट और 1 बजकर 9 मिनट पर समाप्त हुए थे। गौरतलब है कि ज्वेरेव के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह पहली बार एक ही सत्र में चारों ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल तक पहुंचे हैं। इस साल उन्होंने फ्रेंच ओपन जीतकर अपने करियर का पहला ग्रैंड स्लैम खिताब भी हासिल किया था। इसके अलावा वह विंबलडन के फाइनल में भी पहुंचे थे। अल्काराज के बाहर होने के बाद अब ज्वेरेव को खिताब का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, उनका सफर पूरी तरह आसान नहीं रहा है। शुरुआती दो मुकाबलों में उन्हें पांच सेट तक जाना पड़ा था। इस साल यूएस ओपन में ज्वेरेव अब तक 80 गेम गंवा चुके हैं। शीर्ष वरीय खिलाड़ियों में उनसे ज्यादा गेम गंवाने का आंकड़ा केवल राफेल नडाल का है, जिन्होंने 2018 में सेमीफाइनल तक पहुंचते हुए 85 गेम गंवाए थे। ज्वेरेव के सामने अब रूस के कैरेन खाचानोव की चुनौती होगी। खाचानोव ने बेल्जियम के अलेक्जेंडर ब्लॉक्स के चोटिल होकर मुकाबले से हटने के बाद सेमीफाइनल में प्रवेश किया। उस समय खाचानोव 6-2, 7-5, 3-2 से आगे थे। ब्लॉक्स के लिए यह टूर्नामेंट शानदार रहा, लेकिन क्वार्टर फाइनल में उनका शरीर साथ नहीं दे सका। पहले उन्हें पैर में छाले के लिए उपचार लेना पड़ा और बाद में पीठ की परेशानी बढ़ गई। इससे पहले चौथे दौर के मुकाबले में भी वह पसली की चोट से परेशान थे। उन्होंने कहा कि इस बार उनका शरीर जवाब दे गया और दर्द बढ़ता जा रहा था। वह नहीं चाहते थे कि चोट और गंभीर हो और पूरा सीजन खराब हो जाए। बता दें कि खाचानोव ने 2023 के ऑस्ट्रेलियन ओपन के बाद पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। कभी विश्व रैंकिंग में आठवें स्थान तक पहुंच चुके खाचानोव हाल के खराब नतीजों के कारण अब 50वें स्थान पर हैं और 2018 के बाद पहली बार किसी ग्रैंड स्लैम में बिना वरीयता के उतरे हैं। खाचानोव ने कहा कि ज्वेरेव को हराने के लिए उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा। वहीं ज्वेरेव ने भी अपने अगले प्रतिद्वंद्वी को हल्के में लेने से इनकार किया है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि खाचानोव को साथी खिलाड़ी टेनिस का प्रोफेसर कहते हैं, क्योंकि उन्हें खेल की बारीकियों और खिलाड़ियों की तकनीक की बहुत गहरी जानकारी है। ज्वेरेव के लिए यह मुकाबला केवल फाइनल में पहुंचने का मौका नहीं, बल्कि इस साल अपने शानदार ग्रैंड स्लैम अभियान को एक और बड़ी उपलब्धि में बदलने का अवसर भी है।</p>
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		<item>
		<title></title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:34:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[कृषि व वानिकी सहयोग पर India और ASEAN के बीच बनी 5 साल की नई कार्ययोजना भारत और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) ने खेती और वानिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए पांच साल की नई कार्ययोजना शुरू करने पर सहमति जताई है। दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय राजधानी में इस विषय पर अपनी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कृषि व वानिकी सहयोग पर India और ASEAN के बीच बनी 5 साल की नई कार्ययोजना</p>
<p>भारत और दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) ने खेती और वानिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए पांच साल की नई कार्ययोजना शुरू करने पर सहमति जताई है। दोनों पक्षों ने राष्ट्रीय राजधानी में इस विषय पर अपनी नौवीं मंत्री-स्तरीय बैठक की। नौ सितंबर को हुई इस बैठक की सह-अध्यक्षता फिलिपीन के कृषि मंत्री फ्रांसिस्को पी. तियू लॉरेल (जो आसियान अध्यक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे थे) और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने की। बैठक के बाद जारी बयान के अनुसार, वर्ष 2026-2030 के लिए नई आसियान-भारत मध्यम-अवधि कार्ययोजना चार मुख्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाएगी- जैसे कि मजबूत मूल्य श्रृंखला में नीतिगत बातचीत और व्यापार; संस्थागत नेटवर्किंग और डिजिटल नवाचार, तकनीकी सहयोग एवं संयुक्त अनुसंधान तथा किसानों के आदान-प्रदान के साथ-साथ मानव संसाधन विकास। मंत्रियों ने सहमति व्यक्त की कि योजना को लागू करते समय उन पहल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो व्यावहारिक और किसान-केंद्रित हों। सहयोग के लिए चिह्नित क्षेत्रों में कम उत्सर्जन वाली धान की खेती, जल उत्पादकता, खेती में कृत्रिम मेधा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) का उपयोग, मिट्टी का स्वास्थ्य, जलवायु-अनुकूल फसलें, खाद्य सुरक्षा, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना, फसल अवशेष जलाने के विकल्प और टिकाऊ वन प्रबंधन आदि शामिल हैं। बैठक में वर्ष 2021-25 की मौजूदा योजना के तहत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसमें वर्ष 2023 में जकार्ता और नयी दिल्ली में आयोजित आसियान-भारत मिलेट्स (मोटे अनाज) सम्मेलन और वर्ष 2024 में शुरू किए गए आसियान-भारत फेलोशिप कार्यक्रम जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया गया। इस कार्यक्रम के तहत आसियान देशों के विद्यार्थियों को कृषि और संबंधित विज्ञान में पांच वर्षों के लिए 50 मास्टर छात्रवृत्ति दी जाएंगी। मंत्रियों ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं &#8211; जैसे जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव, उर्वरक और ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव और व्यापार में रुकावट &#8211; ने मजबूत खाद्य और कृषि आपूर्ति श्रृंखलाओं की आवश्यकता को रेखांकित किया है। उन्होंने मजबूत क्षेत्रीय निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणालियों और आपूर्ति के विविध स्रोतों की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसमें छोटे किसानों और कमजोर समूहों पर विशेष ध्यान दिया जाए। बैठक में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों को नई योजना को समय-सीमा, मुख्य एजेंसियों और वित्तपोषण के स्रोतों के साथ एक ‘परिणाम-उन्मुख’ कार्य कार्यक्रम में बदलने का काम सौंपा गया। इस बात पर भी सहमति बनी कि मंत्रियों की बैठक का दसवां संस्करण 2028 में आयोजित किया जाएगा।</p>
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			</item>
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		<title>Middle East Conflict से शेयर बाजार में हड़कंप, Crude Oil $100 पार होने से बढ़ी Inflation की चिंता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:33:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[वैश्विक बाजारों में बुधवार को एक बार फिर चिंता का माहौल दिखाई दिया। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेज कर दिया है। ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। इसके साथ ही निवेशकों के बीच यह &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>वैश्विक बाजारों में बुधवार को एक बार फिर चिंता का माहौल दिखाई दिया। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने कच्चे तेल की कीमतों को तेज कर दिया है। ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया। इसके साथ ही निवेशकों के बीच यह डर बढ़ गया है कि महंगा ईंधन दुनिया भर में महंगाई को फिर से बढ़ा सकता है। ब्रेंट कच्चे तेल का प्रमुख वायदा कान्ट्रैक्ट बुधवार को 100.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। यह 24 जुलाई के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। उस समय अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौते को लेकर उम्मीद बनी हुई थी और तेल की कीमतों में गिरावट देखी जा रही थी। मौजूद जानकारी के अनुसार,अमेरिका ने रातभर की कार्रवाई में ईरान के कच्चे तेल से जुड़े पांच जहाजों को निशाना बनाया। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले किए और समुद्री जहाजों को भी निशाना बनाया। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वाशिंगटन अमेरिकी युद्धपोतों पर कथित हमलों के जवाब में ईरानी तेल टैंकरों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेगा। इस सैन्य तनाव का असर शेयर बाजारों पर भी पड़ा है। अमेरिका के प्रमुख शेयर सूचकांक एसएंडपी 500, डाउ जोंस और नैस्डैक में मामूली गिरावट दर्ज की गई। यूरोप के शेयर बाजार भी करीब एक सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए। औद्योगिक और बैंकिंग कंपनियों के शेयरों पर ज्यादा दबाव देखा गया। कनाडा के प्रमुख शेयरों के वायदा भाव में भी हल्की गिरावट आई। एशियाई बाजारों में हालांकि तस्वीर मिली-जुली रही। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में सुधार जारी रहा। एआई से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी ने इस क्षेत्र को सहारा दिया है। इसके बावजूद महंगे तेल और युद्ध की आशंका के कारण बाजार में जोखिम लेने की प्रवृत्ति कमजोर बनी हुई है। स्विट्जरलैंड की वित्तीय संस्था स्विसकोट की वरिष्ठ विश्लेषक इपेक ओजकारडेस्काया ने कहा कि युद्ध के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा को कमजोर किया है। उनके मुताबिक, गर्मियों में शांति समझौते को लेकर जो उम्मीद बनी थी, सितंबर आते-आते वह कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। रणनीतिकारो ने 100 डॉलर को मुख्य रूप से मनोवैज्ञानिक सीमा बताया। उनका कहना है कि मांग पर बड़ा असर पड़ने के लिए कच्चे तेल की कीमत करीब 150 डॉलर तक पहुंचनी पड़ सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि डीजल की बढ़ती कीमतें महंगाई और सेवा क्षेत्र की लागत को प्रभावित कर सकती हैं। गौरतलब है कि तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से केंद्रीय बैंकों के सामने नई मुश्किल खड़ी हो सकती है। महंगाई बढ़ने की आशंका के कारण ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक की बैठक गुरुवार को होने वाली है, जबकि अमेरिकी केंद्रीय बैंक अगले सप्ताह ब्याज दरों पर फैसला करेगा। बांड बाजार भी इस तनाव से अछूते नहीं हैं। महंगाई की चिंता के चलते हाल के सप्ताहों में बांड पर मिलने वाली रिटर्न रेट बढ़ी है। अगस्त के अंत में अमेरिका और ईरान के बीच हमले फिर शुरू होने के बाद अमेरिका, जापान और कुछ यूरोपीय देशों के प्रमुख सरकारी बांडों की रिटर्न दर कई दशकों के ऊंचे स्तर के करीब पहुंच गई है। इससे सरकारों की उधारी महंगी होने और वैश्विक वित्तीय संस्थानों पर दबाव बढ़ने की चिंता पैदा हुई है। ऐसे में आगे तेल की कीमत और मध्य पूर्व में संघर्ष की दिशा ही वैश्विक बाजारों की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।</p>
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		<title>जीते तो $5000 देंगे&#8230;ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक या वोट खरीदने की सीधी कोशिश? कहां फंस सकता है कानूनी पेंच</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:32:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[ट्रंप ने ऐलान किया कि अगर नवंबर के चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट) में जीत हासिल करती है, तो हर बालिग अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर (लगभग 4 लाख रुपये से अधिक) की रकम दी जाएगी। पैसे देने के बदले चुनाव जीतने की यह शर्त काफी असामान्य &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ट्रंप ने ऐलान किया कि अगर नवंबर के चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी संसद के दोनों सदनों (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट) में जीत हासिल करती है, तो हर बालिग अमेरिकी नागरिक को 5,000 डॉलर (लगभग 4 लाख रुपये से अधिक) की रकम दी जाएगी। पैसे देने के बदले चुनाव जीतने की यह शर्त काफी असामान्य मानी जा रही है, और यह साफ नहीं है कि इस योजना को कैसे लागू किया जाएगा। डेमोक्रेट्स ने इस प्रस्ताव को &#8220;खोखला वादा&#8221; बताया है, साथ ही इस बात पर भी सवाल उठाए गए हैं कि क्या यह योजना अमेरिका के चुनाव कानूनों का उल्लंघन कर सकती है। अमेरिका में लगभग 27 करोड़ वयस्क हैं। उनमें से हर एक को $5,000 का भुगतान करने पर सरकार को लगभग $1.3 ट्रिलियन का खर्च आएगा। इसे लागू करने के लिए अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की मंजूरी लेनी होगी। इससे पहले भी संसद ने परिवारों को 2,000 डॉलर देने के उनके पिछले प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।<br />
क्या ट्रंप का $5,000 देने का वादा गैरकानूनी हो सकता है?<br />
इस सवाल पर कानूनी जानकारों के बीच बहस छिड़ गई है। गैरकानूनी होने का तर्क (वोट खरीदने का आरोप): अमेरिकी संघीय कानून (Federal Law) के मुताबिक, वोट पाने या चुनावी नतीजे को प्रभावित करने के लिए पैसे की पेशकश करना पूरी तरह गैरकानूनी है। चूंकि ट्रंप ने इस $5,000 के भुगतान को सीधे तौर पर रिपब्लिकन पार्टी की जीत से जोड़ा है (कि दोनों सदन जीतने पर ही पैसा मिलेगा), इसलिए कुछ लोग इसे वोटरों को पैसे का लालच देना मान रहे हैं। बचाव में पहला तर्क टैक्स छूट का वादा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इसे सीधे तौर पर रिश्वत या अवैध भुगतान नहीं कहा जा सकता। इसे टैक्स में छूट (Tax Cut) या आर्थिक राहत योजना के चुनावी वादे के रूप में भी देखा जा सकता है, और चुनाव में ऐसी नीतियां पेश करना कानूनी रूप से मान्य होता है। &#8216;द न्यूयॉर्क टाइम्स&#8217; से बात करते हुए एक चुनाव कानून विशेषज्ञ ने बताया कि ट्रंप के इस बयान को अमेरिकी संविधान के &#8216;पहले संशोधन&#8217; (First Amendment) के तहत मिले बोलने की आज़ादी (Free Speech) के अधिकार का संरक्षण भी मिल सकता है। सीधे शब्दों में कहें तो, एक पक्ष इसे &#8220;वोट के बदले पैसे का वादा&#8221; मानकर गैरकानूनी बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे &#8220;चुनावी नीति और बोलने की आज़ादी&#8221; के दायरे में वैध ठहरा रहा है।<br />
ये ट्रंप डिविडेंड क्या है<br />
एक और मुद्दा यह है कि कांग्रेस इन पेमेंट के लिए फंड कैसे देगी और उन्हें मंज़ूरी कैसे देगी। अमेरिका में फ़ेडरल खर्च पर कांग्रेस का कंट्रोल होता है, लेकिन ट्रंप ने अपने भाषण में यह नहीं बताया कि क्या वह इस प्रस्ताव के लिए कांग्रेस की मंज़ूरी लेंगे। ट्रंप ने प्रस्तावित पेमेंट को &#8220;ट्रंप डिविडेंड&#8221; कहा। ट्रंप ने कहा अगर रिपब्लिकन पार्टी &#8216;हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स&#8217; और &#8216;यूनाइटेड स्टेट्स सीनेट&#8217; &#8211; यानी दोनों &#8211; में जीतती है, तो मैं अमेरिका के हर बालिग़ नागरिक को 5,000 डॉलर का डिविडेंड (हिस्सा) दूंगा। उन्होंने कहा कि हम नहीं चाहते कि आप पैसे खर्च करने के लिए कनाडा जाएं। हम नहीं चाहते कि आप चीन या जर्मनी जाएं। आपको अमेरिका में ही पैसे खर्च करने होंगे। यह साफ़ नहीं है कि सरकार इस बात पर कैसे नज़र रखेगी कि पैसे कहाँ खर्च किए जा रहे हैं।<br />
पहले भी ट्रंप कर चुके हैं इस तरह के वादे<br />
$5,000 का यह प्रस्ताव पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने अमेरिकियों को सीधे भुगतान करने का विचार रखा है। इससे पहले भी उन्होंने टैरिफ से होने वाली कमाई से $2,000 के चेक देने का प्रस्ताव दिया था। अमेरिका के दूसरे नेताओं ने भी पहले चुनाव से जुड़े आर्थिक वादे किए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, जॉर्जिया में डेमोक्रेट्स ने वादा किया था कि अगर उनकी पार्टी सीनेट पर कब्ज़ा कर लेती है, तो वे $2,000 की राहत राशि देंगे। ट्रंप का यह नया प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी बढ़ती कीमतों का सामना कर रहे हैं और अमेरिका-ईरान युद्ध का असर ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी पड़ रहा है।</p>
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		<title>सऊदी-हूती जंग की आहट से कांपा पाकिस्तान! &#8216;मक्का पैक्ट&#8217; पर 24 घंटे में बदल गए सुर, फिर हुई अंतरराष्ट्रीय फजीहत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:32:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए &#8216;मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट&#8217; (जिसे कूटनीतिक हलकों में &#8216;इस्लामिक NATO&#8217; भी कहा जा रहा था) को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल मची हुई है। इसी बीच पाकिस्तान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इस तीन-तरफ़ा समझौते पर बड़ा यू-टर्न लिया है। इस्लामाबाद ने अब &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए &#8216;मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट&#8217; (जिसे कूटनीतिक हलकों में &#8216;इस्लामिक NATO&#8217; भी कहा जा रहा था) को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल मची हुई है। इसी बीच पाकिस्तान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इस तीन-तरफ़ा समझौते पर बड़ा यू-टर्न लिया है। इस्लामाबाद ने अब इसे विशुद्ध रूप से एक &#8220;रक्षात्मक गठबंधन&#8221; (Defensive Alliance) करार दिया है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य किसी युद्ध में कूदने के बजाय क्षेत्रीय सुरक्षा और आक्रामकता को रोकना (Deterrence) है। पाकिस्तान का यह बयान ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे लगातार हमलों और उनके जवाब में पाकिस्तानी सेना की संभावित भागीदारी की अटकलों के बाद आया है।<br />
&#8216;मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट&#8217; या &#8216;मक्का पैक्ट&#8217; पर 7 अगस्त को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच साइन किए गए थे। समझौते के तहत, किसी भी सदस्य पर हमले को तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारी अब कह रहे हैं कि इस समझौते का मुख्य मकसद &#8220;मुख्य रूप से डर पैदा करके (deterrence) क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना&#8221; है। पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, &#8220;इस चरण में, मक्का समझौते के विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है।&#8221; &#8220;पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की को सबसे पहले अपने संगठन और सहयोग को और मजबूत करना होगा।&#8221;<br />
सऊदी अरब पर हूथी हमले<br />
खान का यह स्पष्टीकरण पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब पर हूथी हमलों से मक्का समझौता एक्टिवेट हो सकता है। ईरान समर्थित हूथी लगातार सऊदी अरब को निशाना बनाते रहे हैं। मंगलवार को हुए अपने हालिया हमले में, उन्होंने सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से पर मिसाइलों की बौछार कर दी, जिसमें कम से कम 73 लोग घायल हो गए। आसिफ ने मंगलवार रात जियो न्यूज़ को बताया, &#8220;अगर बिना उकसावे के कोई हमला होता है, या यमन में जो कुछ हो रहा है उसका असर सऊदी अरब तक फैलता है, तो निश्चित रूप से मक्का समझौता लागू हो जाएगा।&#8221; &#8220;इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए। हम इस समझौते की शर्तों और नियमों से बंधे हैं, और&#8230; ज़रूरत पड़ने पर हम उनका पालन करेंगे।&#8221; हालांकि, पाकिस्तान ने अब अपना रुख बदल लिया है, जिससे इस्लामाबाद को एक बार फिर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है और यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा है कि क्या वह वास्तव में तुर्की और सऊदी अरब को कोई सुरक्षा गारंटी दे पाएगा। क्या मक्का समझौते का विस्तार होगा? इस बीच, खान ने गुरुवार को यह भी कहा कि अभी यह समझौता सिर्फ़ तीन सदस्यों के बीच है, लेकिन बाद में इसके विस्तार पर फ़ैसला लिया जा सकता है। खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश और मिस्र जैसे कई देशों ने इस समझौते में शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</p>
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		<title>7 साल बाद भारत आ रहे Xi Jinping! 67 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ 24 घंटे की यात्रा, जानें मोदी-जिनपिंग वार्ता का पूरा एजेंडा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:31:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं। यह पिछले सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। यद्यपि बीजिंग ने उनकी यात्रा की सार्वजनिक पुष्टि काफी देर से &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली आ रहे हैं। यह पिछले सात वर्षों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। यद्यपि बीजिंग ने उनकी यात्रा की सार्वजनिक पुष्टि काफी देर से की, लेकिन पृष्ठभूमि में इसकी कूटनीतिक तैयारियां हफ्तों पहले से ही जारी थीं। मामले से अवगत सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली स्थित चीनी दूतावास ने 27 अगस्त को ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ आ रहे 67 सदस्यीय सरकारी प्रतिनिधिमंडल के लिए वीज़ा आवेदन दे दिया था। यह इस बात का स्पष्ट संकेत था कि बीजिंग ने आधिकारिक घोषणा से काफी पहले ही यात्रा की रूपरेखा तैयार कर ली थी। राजनयिक सूत्रों ने &#8216;टाइम्स ऑफ़ इंडिया&#8217; को बताया कि शनिवार शाम को शी की मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक होनी है। चीनी राष्ट्रपति के शनिवार को दोपहर 12:10 बजे नई दिल्ली पहुंचने और अगले दिन दोपहर 12:20 बजे रवाना होने की उम्मीद है, जिससे उनकी यात्रा ठीक 24 घंटे की होगी। इस यात्रा के सिलसिले में एक अलग चीनी व्यापार प्रतिनिधिमंडल के भी भारत आने की उम्मीद है। शी के साथ चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी होंगे, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना की पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और शी के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में से एक, काई ची और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं। चीनी प्रतिनिधिमंडल के शनिवार को दोपहर 2 बजे के आसपास &#8216;भारत मंडपम&#8217; पहुंचने की उम्मीद है, जहां मोदी और अन्य नेता आने वाले सरकार प्रमुखों का स्वागत करेंगे। मोदी और शी के बीच द्विपक्षीय बैठक बहुपक्षवाद पर ब्रिक्स के बंद सत्र और शाम 7:30 बजे नेताओं के लिए मोदी द्वारा आयोजित रात्रिभोज के बीच होने की संभावना है। शी के रात्रिभोज में शामिल होने की उम्मीद है।<br />
यात्रा की घोषणा देर से हुई, लेकिन तैयारियां हफ़्तों से चल रही थीं<br />
बीजिंग की सार्वजनिक घोषणा के समय ने इस बात पर अटकलें तेज़ कर दी थीं कि चीन ने शी की भागीदारी की पुष्टि करने में इतना समय क्यों लिया। हालांकि, तैयारियों से वाकिफ लोगों ने &#8216;टाइम्स ऑफ़ इंडिया&#8217; को बताया कि बीजिंग ने हफ़्तों पहले ही भारतीय पक्ष को उनकी भागीदारी के बारे में औपचारिक रूप से सूचित कर दिया था। शी के प्रतिनिधिमंडल के लिए 27 अगस्त को किया गया वीज़ा अनुरोध इस बात का अहम संकेत था कि यात्रा की तैयारियां पहले से ही चल रही थीं। उम्मीद है कि शी की यह यात्रा, 2024 में कज़ान में ब्रिक्स समिट के दौरान मोदी के साथ हुई उनकी मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों में आए सुधार को और आगे बढ़ाएगी। उस मुलाकात में पूर्वी लद्दाख में 2020 के सैन्य गतिरोध से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और दोनों देशों के बीच बातचीत को फिर से शुरू करने की व्यापक कोशिश की गई थी। उम्मीद है कि शी के साथ बैठक में मोदी निष्पक्ष मार्केट एक्सेस, सप्लाई-चेन की विश्वसनीयता और द्विपक्षीय व्यापार में असंतुलन जैसे मुद्दों पर चिंता जताएंगे, क्योंकि दोनों पक्ष आर्थिक संबंधों को बढ़ाना चाहते हैं। कज़ान में, दोनों नेता उच्च-स्तरीय बातचीत को फिर से शुरू करने पर सहमत हुए और भारत-चीन सीमा विवाद पर अपने विशेष प्रतिनिधियों को सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने की निगरानी का काम सौंपा। भारत का मानना ​​रहा है कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक विकास के लिए ज़रूरी है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>दिल्ली बनी वैश्विक कूटनीति का केंद्र! UN प्रमुख गुटेरेस से लेकर जिनपिंग और पुतिन तक&#8230; जानें विदेशी मेहमानों का पूरा शेड्यूल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 11 Sep 2026 09:30:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे ऐतिहासिक 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी के लिए पूरी तरह तैयार है। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, पश्चिम एशिया संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आयोजित हो रहे इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनियाभर के शीर्ष राष्ट्राध्यक्ष और वैश्विक संगठनों के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राजधानी दिल्ली 12 और 13 सितंबर को आयोजित हो रहे ऐतिहासिक 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की मेज़बानी के लिए पूरी तरह तैयार है। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल, पश्चिम एशिया संकट और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच आयोजित हो रहे इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए दुनियाभर के शीर्ष राष्ट्राध्यक्ष और वैश्विक संगठनों के प्रमुख राष्ट्रीय राजधानी पहुँच रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात अपनी तीन दिवसीय भारत यात्रा पर नई दिल्ली पहुँचे। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र (UN) महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, यूएई और मलेशिया समेत कई देशों के दिग्गज नेता इस महाकुंभ का हिस्सा बन रहे हैं।<br />
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम और होटलों में भव्य स्वागत<br />
विदेशी प्रतिनिधियों और राष्ट्राध्यक्षों के आगमन को देखते हुए राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा के अभूतपूर्व और कड़े इंतज़ाम किए गए हैं। वीवीआईपी नेताओं के आवागमन के लिए विशेष रूट तय किए गए हैं। दूसरी ओर, दिल्ली के प्रमुख लक्जरी होटल विदेशी प्रतिनिधियों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मेहमाननवाज़ी के लिए विशेष इंतज़ाम किए गए हैं, जिनमें प्रामाणिक भारतीय व अंतरराष्ट्रीय व्यंजन, हाउसकीपिंग, गेस्ट सर्विस और त्वरित इन-होटल ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा शामिल है।<br />
मोदी-पुतिन की द्विपक्षीय वार्ता पर दुनिया की नजरें<br />
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच शुक्रवार दोपहर एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक निर्धारित है। इस बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार, निवेश, ऊर्जा सहयोग, रक्षा, आधुनिक तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स और जन-से-जन संपर्क (People-to-People ties) को नए आयाम देने पर चर्चा होगी।<br />
विदेशी प्रतिनिधियों और राष्ट्राध्यक्षों का नई दिल्ली आगमन-<br />
ब्राजील और रूस के उच्चस्तरीय प्रतिनिधियों का आगमन<br />
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय मेहमानों का भारत आगमन 10 सितंबर की रात से ही शुरू हो गया। ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा सबसे पहले पहुंचने वाले प्रतिनिधियों में शामिल थे, जो 10 सितंबर की रात 9:50 बजे नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर पहुंचे। वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपनी बहुप्रतीक्षित तीन दिवसीय भारत यात्रा के तहत 11 सितंबर की तड़के 1:15 बजे पालम स्थित वायु सेना स्टेशन पहुंचे, जहां उनका भव्य और औपचारिक स्वागत किया गया।<br />
वैश्विक संगठनों और विभिन्न राष्ट्रों के प्रमुखों का दिल्ली में तांता<br />
11 सितंबर की सुबह वैश्विक निकायों और प्रमुख देशों के शीर्ष नेताओं के लगातार आगमन की साक्षी बनी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस तड़के 4:10 बजे पहुंचे, जिसके बाद एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) के चेयरमैन झू जियायी (सुबह 8:25 बजे) और उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेटकिन (सुबह 8:45 बजे) टर्मिनल-3 पर उतरे। इसके तुरंत बाद दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति मटामेला सिरिल रामफोसा सुबह 9:05 बजे दिल्ली पहुंचे, जबकि युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो सुबह 9:15 बजे पहुंचीं।<br />
संयुक्त राष्ट्र महासचिव और वैश्विक बैंक प्रमुखों की उपस्थिति<br />
11 सितंबर की दोपहर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम रही। संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस दोपहर 1:25 बजे टर्मिनल-3 पर पहुंचे। इसके कुछ ही समय बाद न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) की अध्यक्ष डिल्मा रूसेफ (दोपहर 2:00 बजे) पहुंचीं। इसी समय ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन भी दोपहर 2:00 बजे पालम एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे। इसके बाद नाइजीरिया के उपराष्ट्रपति सीनेटर काशिम शेट्टिमा दोपहर 2:45 बजे और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी शाम 5:35 बजे पालम एयर बेस पर उतरे।<br />
खाड़ी और एशियाई नेताओं का देर शाम आगमन<br />
11 सितंबर की शाम को अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान शाम 5:50 बजे पालम एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे। उनके बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (शाम 6:40 बजे), इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबिय अहमद अली (शाम 7:30 बजे), और बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदायिशिमिये (रात 8:45 बजे) का आगमन हुआ। रात के समय इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो (रात 9:00 बजे) और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर (रात 10:00 बजे) पालम पहुंचे। वहीं, क्यूबा के विदेश मंत्री ब्रूनो रोड्रिग्ज पारिला (रात 10:50 बजे) और विश्व व्यापार संगठन (WTO) की महानिदेशक डॉ. न्गोज़ी ओकोन्जो-इवेला (रात 11:35 बजे) टर्मिनल-3 पर पहुंचे।<br />
शी जिनपिंग समेत अन्य शीर्ष नेताओं की शनिवार को आवभगत<br />
12 सितंबर को भी कई वैश्विक दिग्गजों का आगमन जारी रहेगा। बेलारूस के विदेश मंत्री मैक्सिम रिज़ेनकोव तड़के 5:35 बजे और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग सुबह 11:05 बजे टर्मिनल-3 पहुंचेंगे। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोपहर 12:25 बजे पालम एयर फोर्स स्टेशन पर उतरेंगे। इसके बाद बहरीन के विदेश मंत्री डॉ. अब्दुल लतीफ बिन राशिद अल ज़यानी (दोपहर 3:30 बजे), कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव (शाम 4:10 बजे) और सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद रात 9:00 बजे पालम स्थित वायु सेना स्टेशन पर पहुंचकर शिखर सम्मेलन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।<br />
ब्रिक्स समिट का फोकस भोजन और ऊर्जा के क्षेत्र में सामूहिक मज़बूती बढ़ाने पर होगा<br />
गौरतलब है कि शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स समिट में भोजन, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा प्रबंधन और ज़रूरी सप्लाई चेन में सामूहिक मज़बूती बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। साथ ही, नई दिल्ली इस समूह को बिखरे हुए भू-राजनीतिक माहौल में एक प्रभावी आधार के तौर पर पेश कर रही है। यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया संकट (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी) और ट्रंप प्रशासन की व्यापार और टैरिफ नीतियों के प्रतिकूल प्रभावों का सामना कर रही है। इसके अलावा, शुक्रवार दोपहर पुतिन और पीएम मोदी के बीच व्यापक द्विपक्षीय बातचीत होनी है। इस बैठक में रक्षा, ऊर्जा, तकनीक, फार्मास्यूटिकल्स और लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है।</p>
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