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	<title>Bharat Ki Tasveer</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
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		<title>Bangladesh PM से मिलने के तुरंत बाद Delhi आकर PM Modi से मिले Dinesh Trivedi, पलट गया पूरा खेल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:46:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पिछले कुछ समय से जिस तरह की तल्खी और अविश्वास दिखाई दिया है, उसके बीच मोदी सरकार ने अब कूटनीतिक संवाद को फिर से पटरी पर लाने की स्पष्ट कोशिश शुरू कर दी है। ढाका में उच्चस्तरीय मुलाकातों के बाद भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में पिछले कुछ समय से जिस तरह की तल्खी और अविश्वास दिखाई दिया है, उसके बीच मोदी सरकार ने अब कूटनीतिक संवाद को फिर से पटरी पर लाने की स्पष्ट कोशिश शुरू कर दी है। ढाका में उच्चस्तरीय मुलाकातों के बाद भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलना नई राजनीतिक परिस्थितियों में भारत की बांग्लादेश नीति को लेकर गंभीर मंथन का संकेत है। हम आपको बता दें कि ढाका में दिनेश त्रिवेदी ने पहले विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से मुलाकात की और उसके बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान तथा गृहमंत्री सलाहुद्दीन अहमद से अलग-अलग बातचीत की। प्रधानमंत्री रहमान के साथ बैठक में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन पहुंचाया और भारत की ओर से बांग्लादेश की सरकार तथा जनता के साथ सकारात्मक, रचनात्मक और भविष्य उन्मुख तरीके से काम करने की इच्छा जताई। दोनों पक्षों ने आपसी हित के मुद्दों पर चर्चा की और रिश्तों को ‘पीपुल-सेंट्रिक’ यानी आम लोगों के हितों पर केंद्रित बनाने पर जोर दिया। गृहमंत्री के साथ बातचीत में सुरक्षा सहयोग भी प्रमुख मुद्दा रहा। यही इस पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। भारत यह संकेत दे रहा है कि ढाका में सत्ता परिवर्तन के बावजूद वह बांग्लादेश के साथ अपने दीर्घकालिक हितों को किसी एक राजनीतिक नेतृत्व तक सीमित नहीं करना चाहता। आपसी हित, पारस्परिक लाभ और संवेदनशीलताओं का सम्मान करने संबंधी नई दिल्ली के संदेश इस बात को रेखांकित करते हैं कि भारत रिश्तों में स्थायित्व चाहता है, टकराव नहीं। लेकिन इस कूटनीतिक पहल की राह आसान नहीं है। सबसे बड़ी पेचीदगी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर है। बांग्लादेश लगातार हसीना को भारत से वापस भेजने की मांग कर रहा है। जिस पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि इस अनुरोध की भारत में स्थापित प्रक्रियाओं के अनुरूप जांच की जा रही है और प्रक्रिया पूरी होने पर जानकारी दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि शेख हसीना अगस्त 2024 में अपनी सरकार के पतन के बाद भारत आ गईं थीं। बांग्लादेश की पिछली सरकार भी उनके प्रत्यर्पण की मांग कर चुकी थी और उन्हें तथा पूर्व गृहमंत्री असदुज्जमान खान कमाल को 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। देखा जाये तो नई दिल्ली के लिए यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि बेहद संवेदनशील कूटनीतिक प्रश्न भी है। हाल ही में भारत में शेख हसीना के एक वर्चुअल कार्यक्रम को लेकर ढाका ने कड़ा विरोध जताया था। भारत ने साफ किया कि कार्यक्रम एक निजी मीडिया संस्था ने आयोजित किया था और सरकार का उससे कोई संबंध नहीं था। ऐसे माहौल में नई दिल्ली का दिनेश त्रिवेदी के जरिए नई बांग्लादेशी सरकार तक संवाद का संदेश पहुंचाना इस बात का संकेत है कि वह विवादित मुद्दों को रिश्तों के व्यापक ढांचे पर हावी नहीं होने देना चाहता। हम आपको यह भी बता दें कि दिनेश त्रिवेदी को बांग्लादेश में भारत का उच्चायुक्त बनाना भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत था। वरिष्ठ राजनीतिज्ञ और लंबे राजनीतिक अनुभव वाले त्रिवेदी को ढाका भेजकर नई दिल्ली ने यह संदेश देने की कोशिश की थी कि बांग्लादेश के साथ रिश्तों में पैदा होने वाली जटिलताओं को केवल नौकरशाही या सुरक्षा के चश्मे से नहीं, बल्कि राजनीतिक संवाद और परिपक्व कूटनीति के जरिए सुलझाने की जरूरत है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच शेख हसीना के प्रत्यर्पण, सीमा सुरक्षा और राजनीतिक अविश्वास जैसे संवेदनशील मुद्दे मौजूद हैं, एक अनुभवी राजनीतिक चेहरे को संवाद का माध्यम बनाना बताता है कि मोदी सरकार रिश्तों को टकराव की दिशा में ले जाने की बजाय बातचीत के जरिए स्थिर और संतुलित करना चाहती है। त्रिवेदी की ढाका में लगातार उच्चस्तरीय मुलाकातें और उसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी से उनकी बैठक इसी व्यापक राजनीतिक कूटनीति की अगली कड़ी के तौर पर देखी जा सकती है। देखा जाये तो रणनीतिक दृष्टि से बांग्लादेश भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। बंगाल की खाड़ी में उसकी भौगोलिक स्थिति, पूर्वोत्तर भारत से उसका जुड़ाव, सीमा सुरक्षा और क्षेत्रीय संपर्क, ये सभी भारत की दीर्घकालिक रणनीति से सीधे जुड़े हैं। इसी कारण सुरक्षा सहयोग को फिर से मजबूत करना महज द्विपक्षीय मुद्दा नहीं, बल्कि भारत की पूर्वोत्तर और हिंद-प्रशांत रणनीति का भी हिस्सा है। इस संदर्भ में भारत द्वारा प्रधानमंत्री तारिक रहमान को दो अलग-अलग निमंत्रण दिया जाना खास महत्व रखता है। एक निमंत्रण द्विपक्षीय भारत यात्रा का है और दूसरा सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र का, वह भी बिम्सटेक के मौजूदा अध्यक्ष के रूप में। हालांकि बांग्लादेश ने अभी यात्रा पर फैसला नहीं किया है और उसके विदेश मंत्री ने दोनों निमंत्रणों को अलग-अलग रखने पर जोर दिया है। दरअसल, यहीं मोदी सरकार की कूटनीति का बड़ा रणनीतिक दांव दिखाई देता है। भारत बांग्लादेश को केवल द्विपक्षीय रिश्ते के चश्मे से नहीं, बल्कि BIMSTEC और बंगाल की खाड़ी की व्यापक क्षेत्रीय संरचना के केंद्र में देख रहा है। BIMSTEC में भारत, बांग्लादेश, भूटान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड शामिल हैं। बांग्लादेश की अध्यक्षता और BRICS आउटरीच में उसकी संभावित भागीदारी नई दिल्ली को क्षेत्रीय सहयोग के व्यापक मंच पर ढाका से संवाद बढ़ाने का अवसर देती है। इसलिए दिनेश त्रिवेदी की मोदी से मुलाकात को केवल एक राजनयिक रिपोर्टिंग इवेंट मानना भूल होगी। यह उस बड़ी कोशिश का हिस्सा है जिसमें भारत राजनीतिक मतभेदों के बावजूद बांग्लादेश के साथ संवाद की खिड़की खुली रखना चाहता है। हसीना का मुद्दा, सुरक्षा सहयोग, द्विपक्षीय यात्राएं और BIMSTEC जैसे क्षेत्रीय मंच, इन सभी को अलग-अलग संभालते हुए नई दिल्ली रिश्तों को एक नए संतुलन की ओर ले जाने की कोशिश कर रही है। बहरहाल, आखिरकार भारत के लिए मजबूत और स्थिर बांग्लादेश केवल पड़ोसी होने का सवाल नहीं है; यह सीमा सुरक्षा, पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी, बंगाल की खाड़ी में रणनीतिक पहुंच और पूरे दक्षिण एशिया में भारत की भूमिका से जुड़ा प्रश्न है। इसलिए मोदी सरकार के सामने असली चुनौती सिर्फ रिश्ते सुधारने की नहीं, बल्कि उन्हें राजनीतिक बदलावों से ऊपर उठाकर स्थायी रणनीतिक साझेदारी में बदलने की है। ढाका में शुरू हुआ नया संवाद इस दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम जरूर है लेकिन आगे की राह तय करेगी कि यह पहल वास्तविक विश्वास में बदलती है या फिर पुरानी कड़वाहटों के बीच सीमित कूटनीतिक कवायद बनकर रह जाती है।</p>
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		<title>वंदे मातरम् का अपमान अब होगा अपराध : राष्ट्रपति मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी</title>
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		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:46:29 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने को अपराध बनाया गया है। इस कानून के तहत वंदे मातरम् को वही कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो वर्तमान में राष्ट्रगान को प्राप्त है। सरकार की ओर से जारी एक बयान &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को उस विधेयक को मंजूरी दे दी, जिसमें राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या उसे रोकने को अपराध बनाया गया है। इस कानून के तहत वंदे मातरम् को वही कानूनी संरक्षण मिलेगा, जो वर्तमान में राष्ट्रगान को प्राप्त है। सरकार की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई। राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 कानून बन गया है। लोकसभा में 30 जुलाई को यह विधेयक पारित हुआ था, जबकि राज्यसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी। इस कानून के तहत वंदे मातरम् को राष्ट्रगान &#8216;जन गण मन&#8217; के समान दर्जा प्राप्त है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लालकिले की प्राचीर से वंदे मातरम् गाया जाएगा। इससे पहले, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रगान &#8216;जन गण मन&#8217; के गायन को जानबूझकर रोकना या ऐसे गायन में शामिल किसी सभा में व्यवधान डालना प्रतिबंधित था। इन अपराधों के लिए तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। वहीं, दूसरी और उसके बाद की प्रत्येक दोषसिद्धि पर कम से कम एक साल की जेल की सजा का प्रावधान था। हालांकि, पुराने कानून में राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को इसी तरह का कानूनी संरक्षण प्राप्त नहीं था। विधेयक में कहा गया था, &#8221;वर्तमान में, राष्ट्रगीत के रूप में सम्मानित वंदे मातरम् के गायन का अपमान रोकने के लिए कोई विशिष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है। इसलिए, किसी भी व्यक्ति द्वारा जानबूझकर राष्ट्रगीत के गायन को रोकने या ऐसे गायन में संलग्न किसी भी सभा में बाधा उत्पन्न करने से प्रतिबंधित करने के लिए, उक्त अधिनियम की धारा तीन में संशोधन करके राष्ट्रगीत को भी इसके दायरे में शामिल करने का प्रस्ताव है, ताकि ऐसे कृत्यों को दंडनीय बनाया जा सके।&#8221; विधेयक में कहा गया कि संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी, 1950 को कहा था कि बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदे मातरम्, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, को राष्ट्रगान &#8216;जन गण मन&#8217; के समान सम्मान दिया जाएगा और इसका दर्जा भी राष्ट्रगान के बराबर होगा। इस साल की शुरुआत में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान एक साथ बजाए जाएं, तो सबसे पहले वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे। गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को जारी एक आदेश में पहली बार राष्ट्रगीत के गायन के लिए प्रोटोकॉल तय किए। इसमें निर्देश दिया गया कि वंदे मातरम् के छह अंतरे, जिनकी अवधि तीन मिनट 10 सेकंड है, राष्ट्रपति के आगमन, राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राज्यपालों के भाषण जैसे आधिकारिक कार्यक्रमों में गाए जाएंगे। आदेश में कहा गया, &#8221;जब राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों गाए या बजाए जाएं, तो सबसे पहले राष्ट्रगीत गाया या बजाया जाएगा।&#8221; इसमें कहा गया कि जिस सभा या कार्यक्रम में राष्ट्रगीत गाया जाए, वहां मौजूद सभी लोग सावधान की मुद्रा में खड़े रहेंगे। इस आदेश में कहा गया कि सभी स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ की जाएगी।</p>
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		<item>
		<title>Bengaluru के एनआरआई लेआउट में गैराज में लगी भीषण आग, कई Electric Bike जलकर नष्ट</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:45:34 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक में बेंगलुरु के ‘एनआरआई लेआउट’ स्थित एक गैराज में मंगलवार रात लगी भीषण आग में कई इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहन जलकर खाक हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, यह आग मंगलवार रात करीब नौ बजे लगी और देखते ही देखते पूरे गैराज में फैल गई। गैराज में बड़ी &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कर्नाटक में बेंगलुरु के ‘एनआरआई लेआउट’ स्थित एक गैराज में मंगलवार रात लगी भीषण आग में कई इलेक्ट्रिक दो पहिया वाहन जलकर खाक हो गए। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के मुताबिक, यह आग मंगलवार रात करीब नौ बजे लगी और देखते ही देखते पूरे गैराज में फैल गई। गैराज में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बाइक खड़ी थीं। पुलिस ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और दमकलकर्मियों ने काफी देर तक अभियान चलाकर आग पर काबू पाया। उसने बताया कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। पुलिस के अनुसार, गैराज में लगी आग पास के एक निजी अस्पताल तक भी फैल गई, जिससे अस्पताल को काफी नुकसान हुआ है। पुलिस ने बताया कि आग लगने के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। हालांकि, शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है। पुलिस और दमकल एवं आपात सेवा विभाग के कर्मी घटना की जांच कर रहे हैं।</p>
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		<title>लखनऊ में तिरंगे के रंग में रंगा शहर, नगर निगम मुख्यालय से GPO तक निकली भव्य तिरंगा यात्रा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:44:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[देशभक्ति के उत्साह के बीच तिरंगा यात्रा निकाली गई। त्रिलोकी नाथ रोड स्थित नगर निगम मुख्यालय से शुरू हुई यात्रा GPO तक पहुंची। यात्रा में महापौर सुषमा खारवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, नगर निगम के कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल हुए। तिरंगा यात्रा के दौरान शहर में देशभक्ति का माहौल नजर आया। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>देशभक्ति के उत्साह के बीच तिरंगा यात्रा निकाली गई। त्रिलोकी नाथ रोड स्थित नगर निगम मुख्यालय से शुरू हुई यात्रा GPO तक पहुंची। यात्रा में महापौर सुषमा खारवाल, नगर आयुक्त गौरव कुमार, नगर निगम के कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे शामिल हुए। तिरंगा यात्रा के दौरान शहर में देशभक्ति का माहौल नजर आया। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लिए प्रतिभागियों ने यात्रा में उत्साह के साथ भाग लिया। नगर निगम के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ स्कूली बच्चों की भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया।<br />
अधिकारी और कर्मचारी भी बने तिरंगा यात्रा का हिस्सा<br />
यात्रा में नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी सहभागिता की। महापौर सुषमा खारवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार की मौजूदगी में नगर निगम मुख्यालय से GPO तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। स्कूली बच्चों की मौजूदगी ने यात्रा में नई ऊर्जा भर दी। हाथों में तिरंगा लेकर बच्चे देशभक्ति के उत्साह के साथ यात्रा में शामिल हुए।<br />
लखनऊ में देशभक्ति के रंग में नजर आया माहौल<br />
नगर निगम मुख्यालय से GPO तक निकली इस यात्रा ने शहर में देशभक्ति की भावना को प्रमुखता से सामने रखा। सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और स्कूली बच्चों की सामूहिक भागीदारी आयोजन का प्रमुख आकर्षण रही।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>BCCI सहमति के बाद ACB दिल्ली में T20 Series आयोजित करेगा, 13 सितंबर से होंगे मैच</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:44:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) 13, 15 और 17 सितंबर को अरुण जेटली स्टेडियम में तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए भारत की मेजबानी करेगा। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। क्रिकबज वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, एसीबी की इस पुष्टि ने एक से 13 सितंबर तक प्रस्तावित भारत के बांग्लादेश दौरे पर &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड (एसीबी) 13, 15 और 17 सितंबर को अरुण जेटली स्टेडियम में तीन मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के लिए भारत की मेजबानी करेगा। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। क्रिकबज वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, एसीबी की इस पुष्टि ने एक से 13 सितंबर तक प्रस्तावित भारत के बांग्लादेश दौरे पर गंभीर संशय पैदा कर दिया है, जिसमें सीमित ओवर के छह मैच खेले जाने थे। एसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नसीब खान ने बोर्ड के व्यावसायिक साझेदारों को लिखे एक पत्र में कहा, एसीबी इसके द्वारा पुष्टि करता है कि भारत का अफगानिस्तान दौरा 2026, 13 सितंबर से 17 सितंबर तक आयोजित होने वाला है। उन्होंने कहा, एसीबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस कार्यक्रम की तारीखों को भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (बीसीसीआई) की सहमति से तय किया गया है और मैचों के स्थानों को भी अंतिम रूप दे दिया गया है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Mizoram में MZP प्रदर्शन के बाद MPSC भर्ती रुकी, 14 अगस्त तक की परीक्षाएं रद्द</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:43:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[मिजोरम लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने आयोग के कामकाज को लेकर एक प्रभावशाली छात्र संगठन के आंदोलन के बाद कई जारी भर्ती प्रक्रियाओं को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मिजो जिरलाई पावल (एमजेडपी) के सदस्य सोमवार से आयोग कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं और &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>मिजोरम लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने आयोग के कामकाज को लेकर एक प्रभावशाली छात्र संगठन के आंदोलन के बाद कई जारी भर्ती प्रक्रियाओं को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। मिजो जिरलाई पावल (एमजेडपी) के सदस्य सोमवार से आयोग कार्यालय के बाहर धरना दे रहे हैं और कर्मचारियों को कार्यालय में प्रवेश करने से रोक रहे हैं। मंगलवार को आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। एमपीएससी ने एक अधिसूचना में कहा कि कार्यालय में कामकाज बाधित होने के कारण उसे भर्ती संबंधी कई गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है और पहले से निर्धारित कुछ कार्यक्रमों को टालना पड़ा है। आयोग ने कहा कि विभिन्न विभागों में समूह ‘सी’ पदों के लिए होने वाली परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं, क्योंकि मौजूदा स्थिति में एमपीएससी द्वारा तैयार प्रश्नपत्रों का वितरण नहीं किया जा सका है। आयोग ने बताया कि संबंधित विभागों को प्रश्नपत्र वितरण के संबंध में आगे के निर्देशों का इंतजार करने को कहा गया है। वहीं, जिन विभागों ने अपनी भर्ती परीक्षाओं के लिए एमपीएससी के परीक्षा कक्षों का इस्तेमाल करने की व्यवस्था की थी, उन्हें वैकल्पिक इंतजाम करने की सलाह दी गई है। आयोग ने बताया कि 11 से 14 अगस्त के बीच निर्धारित सभी लिखित परीक्षाएं और व्यक्तिगत साक्षात्कार भी स्थगित कर दिए गए हैं, क्योंकि इन्हें तय समय पर आयोजित नहीं किया जा सकता।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<title>Horizon Industrial Parks का IPO 17 अगस्त को खुलेगा, मूल्य दायरा 57-60 रुपये</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:43:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[ब्लैकस्टोन समर्थित होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क्स लिमिटेड का 2,600 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) 17 अगस्त को सार्वजनिक अभिदान के लिए खुलेगा। कंपनी ने इसके लिए 57-60 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया है। मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर आईपीओ के बाद कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 17,298 करोड़ रुपये रहने &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>ब्लैकस्टोन समर्थित होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क्स लिमिटेड का 2,600 करोड़ रुपये का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) 17 अगस्त को सार्वजनिक अभिदान के लिए खुलेगा। कंपनी ने इसके लिए 57-60 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया है। मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर आईपीओ के बाद कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 17,298 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। कपंनी की सार्वजनिक घोषणा में दी गई जानकारी के अनुसार, आईपीओ 19 अगस्त को बंद होगा जबकि बड़े (एंकर) निवेशक 14 अगस्त को बोली लगा पाएंगे। यह निर्गम पूरी तरह से नए शेयर पर आधारित होगा जिनका कुल मूल्य 2,600 करोड़ रुपये तक होगा। इसमें बिक्री पेशकश (ओएफएस) का कोई हिस्सा नहीं है। कंपनी आईपीओ से प्राप्त राशि का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में करेगी। आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार, ब्लैकस्टोन की कंपनी में फिलहाल करीब 89 प्रतिशत हिस्सेदारी है। कंपनी के शेयर को 24 अगस्त बीएसई और एनएसई पर सूचीबद्ध करने का प्रस्ताव है।</p>
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		<title>Praggnanandhaa ने Sinquefield Cup में सिंदारोव को हराया, हासिल की पहली जीत</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:42:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञाननंदा ने ग्रैंड शतरंज टूर की प्रतियोगिता सिंकफील्ड कप के दूसरे दौर के मैच में जावोखिर सिंदारोव के डिफेंस को ध्वस्त करते हुए अपनी पहली जीत दर्ज की। दूसरे दौर के स्टार प्रज्ञाननंदा रहे जिन्होंने रानी के सामने वाले प्यादे से शुरुआत करके धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत की और आखिर में जीत &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञाननंदा ने ग्रैंड शतरंज टूर की प्रतियोगिता सिंकफील्ड कप के दूसरे दौर के मैच में जावोखिर सिंदारोव के डिफेंस को ध्वस्त करते हुए अपनी पहली जीत दर्ज की। दूसरे दौर के स्टार प्रज्ञाननंदा रहे जिन्होंने रानी के सामने वाले प्यादे से शुरुआत करके धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत की और आखिर में जीत हासिल करने में सफल रहे। सिंदारोव ने काले मोहरों से खेलते हुए बाजी ड्रॉ कराने को प्राथमिकता दी लेकिन वह प्रज्ञाननंदा की प्रतिबद्धता का अनुमान नहीं लगा पाए। इसका भारतीय खिलाड़ी को फायदा मिला जिन्होंने 95 चाल में जीत हासिल की। उज्बेकिस्तान के खिलाड़ी सिंदारोव का इस साल के आखिर में विश्व चैंपियन डी गुकेश के खिलाफ विश्व खिताब के लिए मुकाबला होगा। इस जीत से प्रज्ञाननंदा के 1.5 अंक हो गए हैं। उन्होंने पहले दौर की बाजी ड्रॉ खेली थी। इस बीच पहले दौर में जीत हासिल करने वाले एकमात्र खिलाड़ी अमेरिका के फैबियानो कारुआना ने नीदरलैंड के अनीश गिरी के खिलाफ ड्रॉ खेला। दूसरे दौर में प्रज्ञाननंदा सहित चार खिलाड़ियों ने जीत हासिल की। अमेरिका के लेवोन अरोनियन ने जर्मनी के विन्सेंट कीमर को, अमेरिका के ही वेस्ली सो ने नीदरलैंड के जॉर्डन वैन फोरेस्ट को और फ्रांस के मैक्सिम वाचियर-लाग्रेव ने अमेरिका के सावियन सैमुअल को हराया।</p>
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		<title>Mohan Bhagwat New York में 29 अगस्त को भारतीय समुदाय को करेंगे संबोधित</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:40:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[10 अगस्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत इस महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम संगठन के शताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशंस’ &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>10 अगस्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत इस महीने के अंत में अमेरिका की यात्रा के दौरान भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम संगठन के शताब्दी वर्ष में चलाए जा रहे वैश्विक संपर्क अभियान का हिस्सा है। भागवत 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशंस’ (सार्वभौमिक एकता समारोह) नामक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। इसका आयोजन ‘अमेरिकन हिंदूस फॉर इंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (एएचईएडी) कर रहा है। कार्यक्रम में 5,000 से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकियों के शामिल होने की उम्मीद है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रस्तुतियां भी होंगी। एएचईएडी फोरम की अदिति बनर्जी ने एक बयान में कहा, ‘‘यह कार्यक्रम हिंदू त्योहार रक्षाबंधन के उत्सव के साथ-साथ एकता, नागरिक जिम्मेदारी और वैश्विक सद्भाव का समकालीन संदेश भी प्रस्तुत करेगा।’’ उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों से जुड़े वक्ता भी शामिल होंगे।</p>
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		<title>US Senate में Tibet Act पेश, दलाई लामा के बाद भी समर्थन जारी रखने का प्रावधान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 Aug 2026 09:39:58 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[12 अगस्त अमेरिका की सीनेट के सदस्य के एक द्विदलीय समूह ने 14वें दलाई लामा के जीवनकाल के बाद भी तिब्बत के मुद्दे के प्रति अमेरिकी समर्थन जारी रखना सुनिश्चित करने के लिए एक विधेयक पेश किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एवं ओरेगन से सीनेटर जेफ मर्कले और इडाहो से सीनेटर जिम रिश (रिपब्लिकन &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>12 अगस्त अमेरिका की सीनेट के सदस्य के एक द्विदलीय समूह ने 14वें दलाई लामा के जीवनकाल के बाद भी तिब्बत के मुद्दे के प्रति अमेरिकी समर्थन जारी रखना सुनिश्चित करने के लिए एक विधेयक पेश किया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता एवं ओरेगन से सीनेटर जेफ मर्कले और इडाहो से सीनेटर जिम रिश (रिपब्लिकन पार्टी) ने हाल में अमेरिकी सीनेट में ‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ (तिब्बत का भविष्य सुनिश्चित रखने संबंधी विधेयक- एएफटीए) पेश किया। विधेयक में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) को तिब्बती लोगों के वैध प्रतिनिधि और दलाई लामा द्वारा स्थापित शासन व्यवस्था की निरंतरता के रूप में मान्यता देने की बात कही गई है। इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री को निर्वासित तिब्बती सरकार के राजनीतिक प्रमुख सिक्योंग और उसके नामित प्रतिनिधियों के साथ उच्चतम स्तर पर संपर्क बनाए रखने का निर्देश देने का भी प्रावधान है। विधेयक में संयुक्त राष्ट्र में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन को पर्यवेक्षक का दर्जा दिलाने और संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाओं में उसकी समान पहुंच सुनिश्चित करने की पैरवी के जरिए तिब्बती लोगों के मानवाधिकारों और आत्मनिर्णय के अधिकार का समर्थन करने की भी बात कही गई है। सीनेटर टिम केन, टॉड यंग, जैकी रोजेन और रिक स्कॉट भी इस विधेयक के सह-प्रायोजक हैं। यह विधेयक प्रतिनिधि सभा में सांसद जिम मैकगवर्न और माइकल मैककॉल द्वारा 22 मई 2026 को पेश किए गए इसी तरह के विधेयक का सीनेट संस्करण है।</p>
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