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	<title>Bharat Ki Tasveer</title>
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	<description>Hindi News, Lifestyle &#38; Entertainment Articles</description>
	<lastBuildDate>Fri, 25 Sep 2026 06:38:17 +0000</lastBuildDate>
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		<title>सभी 12 राशियों का कैसा रहेगा आज का दिन, पढ़ें आज का राशिफल</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 25 Sep 2026 06:38:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म/अध्यात्म]]></category>
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					<description><![CDATA[आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा। मेष  रिश्तेदारों की तानाकशी मन को ठेस पहुंचाएगी। &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आज कई राशियों के लिए आर्थिक उन्नति और व्यापार में तरक्की के योग बन रहे हैं, जिससे विशेष सफलताएं मिलेंगी। हालांकि, कुछ जातकों को गलतफहमी, स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं और घरेलू विवादों का सामना करना पड़ सकता है, ऐसे में धैर्य और विवेक से काम लेना ज़रूरी होगा।</p>
<p><span style="font-size: 24px; font-weight: bold;">मेष </span></p>
<p>रिश्तेदारों की तानाकशी मन को ठेस पहुंचाएगी। धन नाश होगा, विशेषकर साझेदारी में। सामाजिक पारिवारिक परिवेश बढ़ेगा। सरकारी कामों में सफलता, पिता तुल्यजनों का आर्शीवाद।</p>
<h2>वृष</h2>
<p>व्यापार बढ़ाने के प्रयास सफल होंगे। आपका प्रभाव बढ़ाने वाला दिन है। प्रतियोगिता परिणाम पक्ष में रहेगा। नौकरी व्यवसाय में उन्नति का समाचार।</p>
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<div id="google_ads_iframe_/21715648431/prabhasakshi_article_withincontent_0__container__"><span style="font-size: 24px; font-weight: bold;">मिथुन</span></div>
</div>
</div>
<p>जो भी करेंगे उसमें सफलता मिलेगी। आर्थिक मामलों में उलझे रहेंगे। विशेष प्रशिक्षण के लिए जा सकते हैं। अच्छा दिन नहीं है, परेशान रहेंगे।</p>
<h2>कर्क</h2>
<p>गुरुजनों के स्वास्थ्य की चिंता, खर्च भी बढ़ेगा। घर या कार्यालय में परिवर्तन की संभावना। संतान पक्ष से सहयोग और लाभ की प्राप्ति। दफ्तर में जिम्मेदारियां बढ़ेगी, मानदेय भी बढ़ेगा।</p>
<h2>सिंह</h2>
<p>विरोधी पक्ष आप पर हावी रहेगा। रोजगार व्यवसाय में अच्छा लाभ होगा। स्वास्थ्य भी डगमगाएगा। सभी काम सफलता की ओर बढ़ेंगे।</p>
<h2>कन्या</h2>
<p>मान सम्मान बढेगा, विदेश से भी लाभ और सम्पर्क। बंधु बांधवों का आगमन खुशी देगा। आर्थिक लाभ और नई वस्तुओं की खरीद। आध्यात्म में रूचि बढ़ेगी और लाभ भी होगा।</p>
<h2>तुला</h2>
<p>हर दृष्टि से सतर्क रहें, धोखे का योग है। प्रतियोगिता में सफलता मिलेगी। निर्धारित लक्ष्य पर ध्यान दें। संतान के संबंध में दुविधा की स्थिति दूर होगी।</p>
<h2>वृश्चिक</h2>
<p>बिगड़ेगा हालत सुधरेंगे, वरिष्ठ जनों से लाभ। आपकी प्रतिष्ठा में भी चार चांद लगेंगे। अनुकूल वातावरण से मन प्रसन्न रहेगा। नया करार, नई डील संपन्न।</p>
<h2>धनु</h2>
<p>बनते हुए काम बिगड़ने से दुख होगा। धन लाभ और नई योजनाएं। उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ेंगे। व्यापार व्यवसाय में लाभ साझेदारी में शंका दूर होगी।</p>
<h2>मकर</h2>
<p>कुछ जरूरी दस्तावेज गुम हो सकते हैं। सफलताओं पर बधाइयां प्राप्त होगी। धन के लिए अच्छा, स्वास्थ्य के लिए खराब दिन। विश्वासघात से गहरा मानसिक आघात लग सकता है।</p>
<h2>कुंभ</h2>
<p>कलह योग हैं, अकारण विवाद से बचें। अनेक लाभदायक अवसर प्राप्त होंगे। घर परिवार में आपका सुयश बढ़ेगा। विरोधी पक्ष आप पर हावी रहेगा।</p>
<h2>मीन</h2>
<p>विशेष चिंता का समाधान निकलेगा। घर में अतिथियों के स्वागत सम्मान में व्यस्तता। सामाजिक पारिवारिक परिवेश बढ़ेगा। स्वास्थ्य में बिगाड़, पूंजीनिवेश से घाटा।</p>
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		<title>PM मोदी का युवाओं को बड़ा संदेश- ‘सेवा ही हमारा मुख्य कार्य’, 2047 के विकसित भारत में निभाएं बड़ी भूमिका</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:39:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सेवा संकल्प यात्रा में शामिल लोगों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सेवा को जीवन और राष्ट्र निर्माण का प्रमुख माध्यम बताते हुए युवाओं से सेवा भाव के साथ काम करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा करते हुए ही सेवा का संदेश &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सेवा संकल्प यात्रा में शामिल लोगों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने सेवा को जीवन और राष्ट्र निर्माण का प्रमुख माध्यम बताते हुए युवाओं से सेवा भाव के साथ काम करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा करते हुए ही सेवा का संदेश देना है, इसके लिए उपदेश देने की जरूरत नहीं है।<br />
‘सेवा यात्रियों’ को नमन कर पुण्य का आधा हिस्सा चुराने की कही बात<br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक पुरानी कहावत है कि जब कोई व्यक्ति यात्रा से लौटता है और उसे प्रणाम किया जाता है तो यात्रा से मिले पुण्य का आधा हिस्सा प्रणाम करने वाले को भी मिल जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘आज इन सभी सेवा यात्रियों को नमन करके मैं भी उस पुण्य का आधा हिस्सा चुरा रहा हूं।’’<br />
पीएम मोदी ने सेवा यात्रा में शामिल सभी साथियों से अपना ध्यान रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेवा ही हमारा मुख्य कार्य होना चाहिए और सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश देना है। कोई उपदेश देने की जरूरत नहीं है। हमारे आचरण से लोगों को पता चलना चाहिए कि राजनीति में सत्ता कितनी ही बड़ी क्यों न हो जाए, हमारा मार्ग सेवा का ही रहेगा।<br />
‘सेवा परमो धर्म:’ के भाव से आगे बढ़ने का आह्वान<br />
प्रधानमंत्री ने कहा कि कितने ही ऊंचे शिखर पर पहुंच जाएं, लेकिन ‘सेवा परमो धर्म:’ के भाव को लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेवा के रास्ते से कभी विचलित नहीं होना है। उन्होंने सेवा संकल्प यात्रा और इससे जुड़े युवा साथियों का अभिनंदन करते हुए कहा कि वडनगर और वाराणसी दोनों ही पुरातन और ऐतिहासिक शहर हैं। दोनों शहर हजारों वर्षों से जीवंत हैं। उन्होंने कहा कि वडनगर उनकी जन्मभूमि है, जबकि काशी उनकी कर्मभूमि है। काशी में बाबा विश्वनाथ का आशीर्वाद है और वडनगर हाटकेश्वर महादेव के आशीष की भूमि है।<br />
वडनगर से वाराणसी तक सेवा अभियान<br />
प्रधानमंत्री ने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा के तहत वडनगर से वाराणसी की ओर बढ़ रहे युवा दोनों शहरों के बीच सेवा का बड़ा अभियान चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा में शामिल कुछ साथियों से उन्हें बातचीत करने का अवसर मिला और उनके अनुभव सुनकर ऐसा लगा जैसे वह भी उनके साथ चल रहे हों। पीएम मोदी ने कहा कि जब सेवाभाव से काम किया जाता है तो करोड़ों जरूरतमंदों को मुफ्त अनाज मिलता है। सेवा के भाव से ही आयुष्मान योजना जैसी पहल जन्म लेती है। उन्होंने कहा कि यात्रा में शामिल लोगों ने रास्ते भर देखा होगा कि सेवा के कामों को किस तरह आगे बढ़ाया गया है।<br />
‘राजनीति और चुनाव अपनी जगह, राष्ट्र निर्माण हमारा लक्ष्य’<br />
प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति अपनी जगह है और चुनाव अपनी जगह, जबकि शासन व्यवस्था की अपनी भूमिका है। लेकिन हम राष्ट्र निर्माण के लिए निकले हुए लोग हैं और विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाशक्ति की बहुत बड़ी भूमिका है। इस भूमिका को पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।<br />
युवाओं को देश को करीब से समझने की जरूरत<br />
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी विकसित भारत की निर्माता भी है और यही पीढ़ी उसकी बड़ी लाभार्थी भी होगी। इस दायित्व को निभाने के लिए युवाओं का भारत को जमीन पर जानना और समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युवाओं को देश की बारीकियों को अनुभव करना चाहिए, अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों के लोगों से मिलना चाहिए। उनके सपनों, आकांक्षाओं और समस्याओं को समझना भी जरूरी है। पीएम मोदी ने कहा कि सेवा संकल्प यात्रा निश्चित रूप से युवाओं के जीवन में अहम भूमिका निभाने वाली है।</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
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		<title>यमुना एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसाः स्लीपर बस में आग लगने से 9 यात्रियों की जलकर मौत, CM योगी ने लिया घटना का संज्ञान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:38:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में बुधवार देर रात भीषण आग लगने से एक महिला समेत नौ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 26 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने बताया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही एक स्लीपर बस में बुधवार देर रात भीषण आग लगने से एक महिला समेत नौ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि करीब 26 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र ने बताया कि बस में करीब 35 यात्री सवार थे।<br />
महोबा जा रही थी बस<br />
बस कश्मीरी गेट से उत्तर प्रदेश के महोबा जा रही थी तभी ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर बस में अचानक आग लग गयी। उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद बस में धुआं भर गया और कुछ यात्री बेहोश हो गए। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत ठीक बताई जा रही है। उन्होंने बताया कि घटना के समय कुछ यात्री सो रहे थे।<br />
दमकल, पुलिस ने बस के शीशे तोडकर किया रेस्क्यू<br />
सूचना मिलने पर पुलिस अधिकारी, स्थानीय पुलिसकर्मी, बचावकर्मी, जेवर टोल प्लाजा पर तैनात एक दमकल गाड़ी और चार अन्य दमकल वाहन तुरंत मौके पर पहुंचे और आग बुझायी&#8221; उन्होंने बताया, &#8221;इस अभियान के दौरान 20 से अधिक यात्रियों को सुरक्षित बचाया गया। जब पुलिस और अग्निशमन सेवा के कर्मचारी धुएं के बीच बस के अंदर घुसे, तो वहां नौ लोग मृत पाए गए। ऐसा लगता है कि उनकी मौत जलने या दम घुटने से हुई थी।&#8221; दमकल, पुलिस और जिला प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान चलाया। बस के शीशे तोड़ने के साथ गैस कटर की मदद से उसके हिस्से काटकर फंसे यात्रियों और शवों को बाहर निकाला गया। कुछ मृतकों की पहचान हो गई है, जबकि अन्य की पहचान की जा रही है।<br />
घटना के कारणों की जांच कर रही पुलिस<br />
पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रही है और सभी मृतकों की पहचान कर उनके परिजनों को सूचना देने का प्रयास किया जा रहा है। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। मुख्य दमकल अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि पंजीकरण संख्या BR32PA8647 वाली बस नयी दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही थी, तभी जेवर थाने इलाके में यमुना एक्सप्रेसवे पर उसमें आग लग गई। शुरुआती जांच से पता चला है कि बस की एयर-कंडीशनिंग प्रणाली में चिंगारी या धमाके की वजह से इंजन के &#8216;लुब्रिकेंट ऑयल&#8217; में आग लग गई होगी, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। पुलिस ने बताया कि मृतकों की शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं। पुलिस ने एक बयान में कहा, &#8221;संबंधित धाराओं के तहत एक मामला दर्ज किया गया है तथा बस के चालक व परिचालक को हिरासत में लिया गया है।&#8221;<br />
सीएम ने लिया घटना का संज्ञान<br />
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50-50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
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		<item>
		<title>न्यूयॉर्क में गूंजा श्री श्री रवि शंकर का संदेश: &#8216;बिना आंतरिक शांति के अधूरा है आर्थिक विकास!&#8217;</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:37:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में आयोजित सेमाफोर के ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों, वैश्विक संस्थानों और कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का केंद्र प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन के जरिए आर्थिक अवसरों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में आयोजित सेमाफोर के ‘द नेक्स्ट 3 बिलियन’ सम्मेलन को संबोधित किया। सम्मेलन में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों एवं शासनाध्यक्षों, वैश्विक संस्थानों और कारोबारी जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। चर्चा का केंद्र प्रौद्योगिकी और डिजिटल समावेशन के जरिए आर्थिक अवसरों का विस्तार रहा। सम्मेलन में केन्या के राष्ट्रपति विलियम सामोई रुटो, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की प्रधानमंत्री जूडिथ सुमिनवा, विश्व व्यापार संगठन की महानिदेशक डॉ. न्गोजी ओकोंजो-इवेला और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।<br />
‘शांति के बिना समृद्धि संभव नहीं’<br />
सेमाफोर के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी जस्टिन बी. स्मिथ के साथ संवाद में गुरुदेव ने कहा कि आर्थिक विकास को आंतरिक कल्याण से अलग करके नहीं देखा जा सकता। अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के एक दिन बाद आयोजित सत्र में उन्होंने कहा, “समृद्धि शांति के साथ आती है। यदि शांति नहीं होगी, तो समृद्धि भी नहीं हो सकती।”<br />
अमीर-गरीब की खाई पाटने पर जोर<br />
गुरुदेव ने कहा कि संपन्न और वंचित वर्गों के बीच की खाई लगभग हर देश में मौजूद है और अमेरिका भी इससे अछूता नहीं है। उनके मुताबिक, इस अंतर को कम करने के लिए समाज के दोनों वर्गों को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि लोगों को “पीड़ित मानसिकता” से बाहर निकलकर अपने विकास की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। वहीं, जिन लोगों के पास पर्याप्त संसाधन हैं, उन्हें सहानुभूति और साझा करने के महत्व को समझना होगा। गुरुदेव ने भ्रष्टाचार को भी एक बड़ी वजह बताया, जिसके कारण वैश्विक दक्षिण के कई देशों में उपलब्ध संसाधन जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच पाते।<br />
500 बेरोजगार युवाओं का उदाहरण<br />
गुरुदेव ने भारत के एक ग्रामीण क्षेत्र में आर्ट ऑफ लिविंग केंद्र के आसपास रहने वाले करीब 500 बेरोजगार युवाओं का उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से दिए गए 200 परियोजना प्रस्तावों को युवाओं ने यह मानकर ठुकरा दिया था कि इनमें से कुछ भी काम नहीं करेगा। इसके बाद दो महीने के एक कार्यक्रम के जरिए युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया। गुरुदेव के मुताबिक, इसके बाद युवाओं की सोच में बदलाव आया। उन्होंने बताया कि इसी मॉडल को बाद में केन्या, घाना, नाइजीरिया, बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीका के अन्य देशों में भी अपनाया गया।<br />
तनाव से संवाद और कारोबार पर असर<br />
कार्यस्थल से जुड़े मुद्दों पर गुरुदेव ने कहा कि तनाव संवाद की प्रक्रिया में बाधा डालता है और इसका प्रभाव कारोबारी संस्थानों पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के दौर में बेहतर तरीके से आगे बढ़ने के लिए लोगों में अपनेपन और सुरक्षा की भावना होना जरूरी है।<br />
AI पर गुरुदेव का अनोखा जवाब<br />
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI को लेकर जस्टिन बी. स्मिथ के सवाल पर गुरुदेव ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “इंटेलिजेंस की अनुपस्थिति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस- ये तीन अवस्थाएं हैं।” सत्र के अंत में स्मिथ ने कहा कि अगर उन्हें इन तीनों में से किसी एक को चुनना हो तो वह तीसरे विकल्प को चुनेंगे।<br />
‘एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ पर भी काम<br />
गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने चेतना के क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘इंस्टीट्यूट ऑफ एब्सोल्यूट इंटेलिजेंस’ की स्थापना भी की है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>भारत को PIF में मिला &#8216;रणनीतिक साझेदार&#8217; का दर्जा, प्रशांत महासागरीय देशों के साथ सहयोग होगा मजबूत, जयशंकर ने बताया बड़ा कदम</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:35:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[प्रशांत महासागरीय क्षेत्र (Pacific Region) में भारत के कूटनीतिक और विकासात्मक संबंधों को एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई मिली है। भारत को &#8216;प्रशांत द्वीप समूह फोरम&#8217; (Pacific Islands Forum &#8211; PIF) में आधिकारिक रूप से ‘‘रणनीतिक साझेदार श्रेणी’’ (Strategic Partner Category) में शामिल कर लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>प्रशांत महासागरीय क्षेत्र (Pacific Region) में भारत के कूटनीतिक और विकासात्मक संबंधों को एक नई और ऐतिहासिक ऊंचाई मिली है। भारत को &#8216;प्रशांत द्वीप समूह फोरम&#8217; (Pacific Islands Forum &#8211; PIF) में आधिकारिक रूप से ‘‘रणनीतिक साझेदार श्रेणी’’ (Strategic Partner Category) में शामिल कर लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के इतर आयोजित भारत-एफआईपीआईसी (FIPIC &#8211; Forum for India-Pacific Islands Cooperation) विदेश मंत्रियों की बैठक की सह-अध्यक्षता करते हुए भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने इस घटनाक्रम को एक अत्यंत &#8220;सकारात्मक विकास&#8221; करार दिया और विश्वास व्यक्त किया कि इससे प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ भारत के रिश्ते और अधिक प्रगाढ़ व मजबूत होंगे। बैठक में जयशंकर ने कहा कि उन्हें प्रशांत द्वीप समूह फोरम (पीआईएफ) के महासचिव बैरन वाका का पत्र प्राप्त कर खुशी हुई, जिसमें उन्हें बताया गया है कि ‘‘भारत को पीआईएफ में रणनीतिक साझेदार श्रेणी में शामिल किया गया है। यह एक सकारात्मक घटनाक्रम है और मुझे विश्वास है कि इससे हमारे सहयोग को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।’’ वर्ष 1971 में स्थापित पैसिफिक आइलैंड्स फोरम में 18 सदस्य हैं। इनमें ऑस्ट्रेलिया, कुक आइलैंड्स, माइक्रोनेशिया के संघीय राज्य, फिजी, फ्रेंच पोलिनेशिया, किरिबाती, नाउरू, न्यू कैलेडोनिया, न्यूजीलैंड, नियू, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, मार्शल आइलैंड्स गणराज्य, समोआ, सोलोमन आइलैंड्स, टोंगा, तुवालु और वानुआतु शामिल हैं। बैठक में जयशंकर ने नेताओं के साथ 2023 में आयोजित तीसरे एफआईपीआईसी शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति पर चर्चा की। इसमें फोरम के ढांचे के तहत विकास साझेदारी के साथ-साथ भारत-संयुक्त राष्ट्र विकास साझेदारी कोष के तहत हुई प्रगति शामिल थी। उन्होंने कहा कि दोनों ढांचों के तहत कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जो आजीविका मजबूत करने, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह रेखांकित करना चाहता हूं कि भारत ब्लू पैसिफिक महाद्वीप के लिए 2050 की रणनीति का पूरी तरह सम्मान और समर्थन करता है।’’ उन्होंने उस रूपरेखा का जिक्र किया, जो एक क्षेत्र के रूप में तथा प्रशांत क्षेत्र के देशों और क्षेत्रों, समुदायों और लोगों के रूप में मिलकर काम करने के लिए प्रशांत क्षेत्र के नेताओं के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को निर्धारित करती है। जयशंकर ने फिजी में 100 बिस्तरों वाले सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया। भारत को 12 सदस्य देशों से 20 समुद्री एंबुलेंस की मांग मिली है।<br />
जयशंकर ने विश्वास जताया कि ‘‘मार्च 2027 तक हम इन्हें उपलब्ध कराने की स्थिति में होंगे।’’ फिजी में अगले महीने कृत्रिम अंग लगाने के लिए एक शिविर आयोजित करने की भी योजना बनाई जा रही है। इससे जरूरतमंद करीब 650 मरीजों को लाभ मिलेगा। भारत ने 14 प्रशांत द्वीपीय देशों में 2,800 घरों में सौर ऊर्जा की सुविधा उपलब्ध कराने का काम पूरा कर लिया है और 70 महिला सौर इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया है। जयशंकर ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रशांत क्षेत्र के प्रति भारत का दृष्टिकोण लगातार मांग-आधारित, विकास-केंद्रित और जन-केंद्रित रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में भारत की विकास परियोजनाएं आजीविका मजबूत करने, क्षमता निर्माण और सतत विकास को बढ़ावा देने के हमारे साझा दृष्टिकोण को दर्शाती हैं।’’ मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, नवीकरणीय ऊर्जा, संपर्क, प्रौद्योगिकी और क्षमता निर्माण सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित कार्ययोजना के संबंध में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। अल नीनो के प्रशांत द्वीपीय देशों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा करने का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारत इस प्राकृतिक घटना के प्रतिकूल प्रभावों को कम करने में मदद करने के लिए तैयार है। उन्होंने अंतरिक्ष, टिकाऊ तटीय और महासागरीय अनुसंधान के क्षेत्र में सहयोग के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला। भारत ने सदस्य देशों को अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और आपदा रोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इन दोनों पहलों के तहत कई परियोजनाएं पहले से जारी हैं।</p>
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		<title>कर्नाटक में गहराया Drought संकट, डी. के. शिवकुमार ने केंद्र से 50% राहत राशि मांगी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:34:36 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राज्य के सूखा राहत ज्ञापन में मांगी गई राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अंतरिम वित्तीय सहायता के रूप में जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने राज्य में सूखे की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए यह मांग की। मोदी को लिखे पत्र &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से राज्य के सूखा राहत ज्ञापन में मांगी गई राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा अंतरिम वित्तीय सहायता के रूप में जारी करने का आग्रह किया। उन्होंने राज्य में सूखे की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए यह मांग की। मोदी को लिखे पत्र में शिवकुमार ने 10 सितंबर को भेजे गए अपने पत्र का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने सूखा घोषित किए गए 101 तालुकों में तत्काल राहत उपायों के लिए 3,705.30 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी। उन्होंने कहा कि राज्य में सूखे की स्थिति और गंभीर हो गई है तथा सूखा प्रबंधन, 2020 की नियमावली में निर्धारित मानकों के तहत वैज्ञानिक आकलन के आधार पर राज्य सरकार ने अतिरिक्त 76 तालुकों को भी सूखा प्रभावित घोषित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘इससे सूखा प्रभावित तालुकों की कुल संख्या बढ़कर 177 हो गई है।’’ उन्होंने कहा कि 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सत्र के अंत तक यह संख्या 200 से अधिक हो सकती है। शिवकुमार ने बताया कि नए घोषित सूखा प्रभावित तालुकों में नुकसान और क्षति का आकलन किया जा रहा है। आकलन पूरा होने के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन कोष (एनडीआरएफ) के तहत सहायता के लिए अतिरिक्त ज्ञापन भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून कर्नाटक में बारिश का प्रमुख मौसम है और जून-अगस्त के दौरान होने वाली बारिश न केवल खरीफ कृषि के लिए बल्कि जलाशयों को भरने, जल विद्युत उत्पादन, चारे की उपलब्धता और भूजल पुनर्भरण के लिए भी महत्वपूर्ण है। शिवकुमार ने विशेष रूप से कावेरी बेसिन के जलाशयों में कम जल भंडारण को लेकर चिंता जताई और कहा कि आने वाले महीनों में इसका असर बेंगलुरु तथा आसपास के जिलों में पेयजल उपलब्धता पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब अंतिम चरण में है और राज्य में बारिश की कुल कमी लगातार बनी हुई है, ऐसे में आने वाले महीनों में सूखे की स्थिति और गंभीर हो सकती है तथा गर्मियों में इसका असर और बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश और मिट्टी में नमी की स्थिति लगातार खराब होने से बड़े पैमाने पर फसल को नुकसान हो सकता है, जो 40 लाख हेक्टेयर से अधिक तक पहुंच सकता है। शिवकुमार ने बताया कि नुकसान और क्षति का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय दल (आईएमसीटी) के राज्य दौरे का प्रस्ताव है।</p>
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		<title>राष्ट्रीय राजधानी से 83 दिन बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून विदा, 14 साल में सबसे छोटा दौर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:32:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
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					<description><![CDATA[दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 83 दिन की अवधि पूरी करने के बाद बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी से विदा ली जो पिछले 14 वर्षों में दिल्ली में मानसून का सबसे छोटा दौर रहा। हालांकि देर से दस्तक देने के बावजूद, इस बार मानसून के दौरान सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 83 दिन की अवधि पूरी करने के बाद बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी से विदा ली जो पिछले 14 वर्षों में दिल्ली में मानसून का सबसे छोटा दौर रहा। हालांकि देर से दस्तक देने के बावजूद, इस बार मानसून के दौरान सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने यह जानकारी दी। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दो जुलाई को दिल्ली में दस्तक दी थी और इसने 23 सितंबर को विदाई ली। यानी मानसून राष्ट्रीय राजधानी में 83 दिन रहा। इसके मुकाबले 2025 में यह 87 दिन, 2024 में 96 दिन और 2023 में 97 दिन रहा था। आईएमडी के आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में इससे कम अवधि तक मानसून आखिरी बार 2012 में रहा था। उस साल मानसून ने सात जुलाई को दस्तक देने के बाद 25 सितंबर को विदाई ली थी। इस तरह 2012 में मानसून 80 दिन ही रहा था। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने इस बार भी दिल्ली में देर से दस्तक दी। वह दो जुलाई को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचा, जबकि इसके पहुंचने की सामान्य तारीख 27 जून है। पांच साल बाद ऐसा हुआ है, जब मानसून ने जुलाई में दिल्ली में दस्तक दी। इससे पहले 2021 में उसने 13 जुलाई को दस्तक दी थी। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून दिल्ली के अलावा पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के अधिकांश हिस्सों तथा उत्तर प्रदेश और गुजरात के कुछ हिस्सों से भी विदा हो गया है। इस बार मानसून की विदाई सामान्य तारीख 25 सितंबर से दो दिन पहले हुई। पिछले साल मानसून 24 सितंबर को दिल्ली से लौटा था। वर्ष 1961 के बाद दिल्ली से मानसून की सबसे जल्दी विदाई 1982 में हुई थी, जब वह तीन सितंबर को ही लौट गया। इसके विपरीत 2013 में मानसून 17 अक्टूबर तक डेरा डाले रहा था। मानसून भले ही इस बार कम समय के लिए दिल्ली में ठहरा, लेकिन बारिश के मामले में उसने कोई कमी नहीं छोड़ी। पूरे मौसम में राजधानी में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई। शहर की प्रमुख मौसम वेधशाला सफदरजंग में एक जून से 23 सितंबर तक 728.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 629.7 मिलीमीटर होती है। यानी इस बार बारिश सामान्य से 16 प्रतिशत अधिक रही। आईएमडी के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सामान्य से अधिक बारिश के बावजूद इस साल बारिश का कोई बड़ा रिकॉर्ड नहीं बना। इसकी वजह यह है कि पिछले दो वर्षों में दिल्ली में 900 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि, पूरी दिल्ली में बारिश का दौर एक जैसा नहीं रहा। जुलाई में रिज क्षेत्र में 285.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 188.5 मिलीमीटर है। यानी यहां बारिश सामान्य से 51 प्रतिशत अधिक रही। लोधी रोड में 274.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 201.9 मिलीमीटर की सामान्य बारिश से 36 प्रतिशत अधिक है। आयानगर में जुलाई के दौरान 210.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 178.5 मिलीमीटर है। यहां बारिश सामान्य से 18 प्रतिशत अधिक रही। दूसरी ओर, पालम एकमात्र प्रमुख वेधशाला रहा, जहां सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई। यहां 179.1 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 198.2 मिलीमीटर है। अगस्त मानसून का सबसे ज्यादा बारिश वाला महीना रहा। सफदरजंग में इस माह सामान्य 222.9 मिलीमीटर की तुलना में 354.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई यानी सामान्य से 59 प्रतिशत अधिक।</p>
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		<title>रूस युद्ध में India समेत 47 देशों के लोगों का कर रहा इस्तेमाल: UNGA में बोले Zelenskyy</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:31:04 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि रूस उनके देश के खिलाफ युद्ध में भारत और 40 से अधिक अन्य देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है तथा उन्होंने इन देशों से अपील की कि वे उन्हें ‘‘इस युद्ध में घसीटने’’ से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रोकें। जेलेंस्की &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा कि रूस उनके देश के खिलाफ युद्ध में भारत और 40 से अधिक अन्य देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है तथा उन्होंने इन देशों से अपील की कि वे उन्हें ‘‘इस युद्ध में घसीटने’’ से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को रोकें। जेलेंस्की ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की आम बहस को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘और अभी मैं यूरोप से बात नहीं करना चाहता। मैं उन देशों से बात करना चाहता हूं, जिनके लोगों का रूस एक और बेहद क्रूर अभियान में इस्तेमाल करने की कोशिश कर सकता है।’’ उन्होंने कहा कि यूक्रेन को युद्धबंदियों के रूप में कई देशों के नागरिक मिलते हैं और ये केवल उत्तर कोरिया के नागरिक नहीं हैं। जेलेंस्की ने कहा, ‘‘हम जानते हैं कि रूस अपने युद्ध में 47 देशों के नागरिकों का इस्तेमाल कर रहा है। इस युद्ध में घाना, नेपाल, ताजिकिस्तान, भारत, यमन, केन्या, जिम्बाब्वे, क्यूबा, बेलारूस, सूडान, दक्षिण अफ्रीका और कई अन्य देश शामिल हैं। और समय-समय पर हमें कुछ युद्धबंदियों को उनके देश वापस भेजने के अनुरोध मिलते हैं।’’ उन्होंने कहा कि यूक्रेन को पता है कि युद्ध में लड़ रहे अन्य देशों के नागरिक भी युद्ध के मैदान में मारे जा रहे हैं। जेलेंस्की ने कहा, ‘‘हम युद्ध के मैदान में ऐसे लोगों को भी मरते हुए देखते हैं, जो रूसी नहीं हैं, जो आपके देशों के लोग हैं, 47 देशों के लोग हैं और जो छल-कपट तथा चालों के जरिए रूस पहुंच गए।’’ उन्होंने इन 47 देशों के प्रत्येक प्रतिनिधि से सीधे अपील करते हुए कहा, ‘‘आप जानते हैं कि रूस आपके लोगों, आपके नागरिकों के साथ क्या कर रहा है। उनका ध्यान रखें और उन्हें किसी दूसरे मोर्चे पर जाने से रोकें। (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन को आपको इस युद्ध में घसीटने न दें। रूस को अपनी समस्याओं से निकलने, अपनी शर्म छिपाने और अपने पागलपन की कीमत आपके लोगों की जान से चुकाने न दें। उसके कार्रवाई करने की गुंजाइश सीमित करें। उसके धन के स्रोत सीमित करें। उसके युद्ध को सीमित करें।’’ भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि भारतीय नागरिकों की रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती का मुद्दा भारत और रूस के बीच ‘‘विभिन्न स्तरों पर कई मौकों पर’’ उठाया गया है। मिस्री ने कहा था, ‘‘पिछली बार तक हमारे पास 227 भारतीय नागरिकों के बारे में जानकारी थी, जिन्हें रूसी सेना में भर्ती किया गया था।’’ उन्होंने कहा था, ‘‘इनमें से 139 भारतीय नागरिकों को सेना से मुक्त किए जाने की जानकारी हमें मिली है। और दुर्भाग्य से, हमारे पास अब तक 51 लोगों के मारे जाने की भी जानकारी है।</p>
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		<title>राष्ट्रपति Donald Trump ने प्रोटोकॉल तोड़कर Joint Base Andrews पर किया भव्य स्वागत, व्यापार और ताइवान पर होंगी निर्णायक चर्चा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:29:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने तीन दिवसीय उच्चस्तरीय सरकारी दौरे पर बुधवार को वाशिंगटन पहुंचे। अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक तनाव के बीच हो रहा यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस तीन दिवसीय (23 से 25 सितंबर) दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने तीन दिवसीय उच्चस्तरीय सरकारी दौरे पर बुधवार को वाशिंगटन पहुंचे। अमेरिका-चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक तनाव के बीच हो रहा यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस तीन दिवसीय (23 से 25 सितंबर) दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच व्यापार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्रिटिकल मिनरल्स (दुर्लभ खनिज), ताइवान और फेंटेनाइल जैसे संवेदनशील वैश्विक व द्विपक्षीय मुद्दों पर गहन चर्चा होगी।<br />
ट्रंप ने जॉइंट बेस एंड्रयूज पर शी का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया<br />
स्वागत समारोह की तैयारियों के बीच ट्रंप और मेलानिया शी के आगमन से पहले ही जॉइंट बेस एंड्रयूज पहुंच गए थे। इस मौके के लिए मिलिट्री ऑनर गार्ड और बैंड को तैनात किया गया था, और एयरफील्ड को औपचारिक डिप्लोमैटिक स्वागत के लिए तैयार किया गया था। व्हाइट हाउस में शी के आने का इंतज़ार करने के बजाय, ट्रंप ने मिलिट्री बेस पर ही उनसे मिलने का फैसला किया। शी अपनी पत्नी पेंग लियुआन का हाथ पकड़कर विमान से बाहर निकले और ट्रंप और मेलानिया ने उनका स्वागत किया। स्वागत समारोह के लिए विमान के पास 100 फुट लंबा रेड कार्पेट बिछाया गया था, जबकि एयरबेस पर मिलिट्री बैंड और ऑनर गार्ड तैनात थे। समारोह में दो B-1 बॉम्बर विमानों का फ्लाईपास्ट भी शामिल था। अमेरिकी सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं के सैन्य कर्मियों ने इस भव्य स्वागत समारोह में भाग लिया, और दोनों देशों के राष्ट्रगान बजाए गए।<br />
हाल के दशकों में विदेशी नेताओं का एयरपोर्ट-लेवल पर इस तरह का स्वागत कम ही देखने को मिला है, जिससे यह जेस्चर वॉशिंगटन में शी के आगमन की सबसे खास बातों में से एक बन गया। मेलानिया ट्रंप ने कहा कि उनके पति शी का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करना चाहते थे क्योंकि &#8220;उनके बीच बहुत अच्छे संबंध हैं&#8221;। व्हाइट हाउस ने इस दौरे को एक जवाबी कदम भी बताया है, क्योंकि इस साल की शुरुआत में शी ने बीजिंग में ट्रंप की मेज़बानी की थी।<br />
एक दशक से ज़्यादा समय में शी का पहला व्हाइट हाउस स्टेट विज़िट<br />
शी का यह दौरा 10 से ज़्यादा सालों में वॉशिंगटन का उनका पहला स्टेट विज़िट है। यह शी और ट्रंप के बीच छह महीने से भी कम समय में दूसरी और आमने-सामने की तीसरी मुलाक़ात है; इससे पहले वे पिछले अक्टूबर में बुसान में और मई में ट्रंप के बीजिंग दौरे के दौरान मिले थे। यह दौरा अमेरिका-चीन संबंधों के एक संवेदनशील मोड़ पर हो रहा है। हालाँकि वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच बातचीत जारी है, लेकिन व्यापार, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान, ज़रूरी मिनरल्स और दूसरे रणनीतिक मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। चीनी अधिकारियों ने कहा है कि दोनों पक्ष बड़े द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिसमें बीजिंग बातचीत और मतभेदों को संभालने के महत्व पर ज़ोर देगा।<br />
एजेंडा में व्यापार समझौता, टैरिफ और रेयर अर्थ शामिल<br />
ट्रंप और शी के बीच बातचीत में व्यापार एक मुख्य मुद्दा हो सकता है। अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ को लेकर मौजूदा समझौता नवंबर में खत्म होने वाला है, इसलिए बातचीत के दौरान इसके भविष्य पर भी ध्यान दिए जाने की संभावना है। अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन कुछ सीमित गैर-रणनीतिक सामानों पर टैरिफ कम करने पर विचार कर रहा है, जिससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं को फ़ायदा हो सकता है। साथ ही, अमेरिका ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह बीजिंग से रियायतें पाने के बदले रणनीतिक सामानों के निर्यात पर लगे नियंत्रण को हटाएगा। ज़रूरी मिनरल्स और रेयर अर्थ की सप्लाई पर भी काफ़ी चर्चा होने की उम्मीद है क्योंकि ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन में इनकी अहम भूमिका है। अधिकारियों ने कहा है कि इन आर्थिक मुद्दों पर पहले से ही बातचीत चल रही है, हालाँकि अभी तक कोई अंतिम नतीजा तय नहीं हुआ है।<br />
AI की दौड़ एक और बड़ी चुनौती<br />
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक और बड़ा मुद्दा है जिसके ट्रंप-शी की बातचीत में छाए रहने की उम्मीद है। दोनों देश एडवांस्ड AI टेक्नोलॉजी के लिए होड़ कर रहे हैं और साथ ही इस बात पर भी बहस कर रहे हैं कि नए सिस्टम की निगरानी और नियमन कैसे किया जाए। अधिकारियों ने AI मॉडल पर दोनों देशों के बीच बेहतर बातचीत और चीनी ओपन-सोर्स सिस्टम की निगरानी से जुड़े संभावित विचारों पर चर्चा की है। हालाँकि, अमेरिकी अधिकारियों ने बातचीत के लिए अपनी अंतिम स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं की है, जिसका मतलब है कि नेताओं की मुलाक़ात के दौरान बातचीत का रुख बदल भी सकता है।<br />
ताइवान, ईरान और फेंटेनाइल को लेकर चिंताएं<br />
उम्मीद है कि नेता व्यापार और टेक्नोलॉजी के अलावा जियोपॉलिटिकल और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बात करेंगे। अमेरिका-चीन संबंधों में ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक बना हुआ है, जबकि ईरान से जुड़ा मौजूदा विवाद भी वॉशिंगटन और बीजिंग के रिश्तों में चिंता का एक बड़ा विषय बन गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि वॉशिंगटन, फेंटेनाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले केमिकल (प्रिकर्सर केमिकल) की आवाजाही को लेकर चीन पर दबाव बनाना जारी रखेगा; ये केमिकल आखिरकार मैक्सिको में आपराधिक समूहों तक पहुँचते हैं। उम्मीद है कि ट्रंप चीन में कैद अमेरिकियों का मामला भी उठाएंगे; यह एक ऐसा मुद्दा है जिस पर दोनों सरकारों के बीच पहले भी बातचीत हो चुकी है।</p>
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		<title>जी-4 देशों का संयुक्त बयान जारी: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों में देरी पर जताई गहरी चिंता</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Bharat Ki Tasveer]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 24 Sep 2026 07:28:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[देश-विदेश]]></category>
		<category><![CDATA[व्यापार]]></category>
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					<description><![CDATA[जी-4 समूह के सदस्य देशों-ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान-ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपेक्षित सुधारों और अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) प्रक्रिया के दौरान हुई प्रगति में कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>जी-4 समूह के सदस्य देशों-ब्राजील, जर्मनी, भारत और जापान-ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अपेक्षित सुधारों और अंतर-सरकारी वार्ता (IGN) प्रक्रिया के दौरान हुई प्रगति में कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के इतर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान डेविड वाडेफुल, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु ने बहुपक्षीय व्यवस्था और सुरक्षा परिषद की कार्यप्रणाली की समीक्षा की। बैठक के बाद जारी यूएनएससी में सुधार पर जी-4 के संयुक्त मंत्रिस्तरीय बयान में कहा गया कि सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपनी मूल जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाने में फिलहाल सक्षम नहीं है। बयान में कहा गया कि यूएनएससी की प्रतिनिधित्व क्षमता, वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। जी-4 देशों ने कहा कि इसकी एक प्रमुख वजह करीब आठ दशक पुरानी व्यवस्था है, जो आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित नहीं करती और शांति तथा सुरक्षा के मौजूदा एवं भविष्य की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के प्रयासों में बाधा डालती है। जी-4 के मंत्रियों ने कहा कि 18 वर्षों की कोशिशों के बावजूद आईजीएन प्रक्रिया यूएनएससी में वास्तविक सुधार की दिशा में कोई ठोस नतीजा देने में काफी हद तक “अप्रभावी” रही है। उन्होंने पिछली आईजीएन बैठक में भी प्रगति नहीं होने पर गहरी चिंता जताई। मंत्रियों ने विशेष रूप से लिखित आधार पर बातचीत शुरू होने से पहले ही तथाकथित ‘समझौता प्रस्ताव’ पेश किए जाने पर गंभीर आपत्ति जताई। जी-4 देशों ने अफसोस जताया कि इस प्रस्ताव में सुरक्षा परिषद की सदस्यता की दोनों श्रेणियों स्थायी और अस्थायी में विस्तार के पक्ष में स्पष्ट बहुमत वाले सदस्य देशों के विचारों को ध्यान में नहीं रखा गया है।</p>
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