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LAC पर शांति बनाए रखने पर भारत-चीन सहमत

भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति को लेकर बुधवार को बीजिंग में ‘भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए कार्यकारी तंत्र’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच “रचनात्मक” और “भविष्योन्मुखी” बातचीत हुई। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखना ही द्विपक्षीय संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य बनाने का मुख्य आधार है।

2020 में गलवान घाटी में हुई थी हिंसक झड़प

वर्ष 2020 में गलवन घाटी में हुई हिंसक झड़प और उसके बाद चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद, पिछले एक साल में दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा पर शांति बनाए रखने में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

इस बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (पूर्वी एशिया) सुजीत घोष ने किया, जबकि चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चीनी विदेश मंत्रालय के सीमा एवं समुद्री मामलों के विभाग के महानिदेशक हाऊ यानकी ने किया।

इस बैठक के दौरान भारत और चीन अगले दौर की ‘विशेष प्रतिनिधियों’ की बैठक के लिए “ठोस तैयारी” करने पर सहमत हुए, जो कि चीन में आयोजित होने वाली है। इससे पहले अगस्त 2025 में, भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच नई दिल्ली में विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता हुई थी, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए थे।

भारत-चीन संबंध

इस बार कार्यकारी तंत्र की बैठक में दोनों देशों ने सीमांकन, सीमा प्रबंधन, संस्थागत तंत्र के निर्माण और सीमा पार सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही, भारतीय पक्ष ने सीमा पार से बहने वाली नदियों पर विशेषज्ञ-स्तरीय तंत्र की अगली बैठक जल्द बुलाने पर विशेष जोर दिया।

दोनों देश राजनयिक और सैन्य स्तर पर नियमित संपर्क बनाए रखने के लिए पूरी तरह सहमत दिखे। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देश अपने तनावपूर्ण संबंधों को पूरी तरह से रीसेट करने का प्रयास कर रहे हैं।

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