UPI से ₹2000 से ऊपर के भुगतान करने पर लग सकता है शुल्क, संसद में पेश विधेयक में किया गया है प्रावधान!
यूपीआई से भुगतान करना आज हर भारतीय की आदत में शुमार हो चुका है लेकिन अब जब इस प्रकार की खबरें आ रही हैं कि सरकार इस पर शुल्क लगा सकती है तो एक ऑनलाइन सर्वे में पाया गया है कि लोग इसके जरिये भुगतान करना कम कर सकते हैं। हम आपको बता दें कि देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था के सबसे बड़े माध्यम बन चुके यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर अब बड़ा नीतिगत बदलाव सामने आ सकता है। केंद्र सरकार ने संसद में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 में संशोधन का विधेयक पेश कर UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का कानूनी रास्ता खोल दिया है। हालांकि सरकार का संकेत है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो इसका दायरा बेहद सीमित रहेगा और आम उपभोक्ताओं के रोजमर्रा के छोटे भुगतान इससे लगभग पूरी तरह बाहर रहेंगे। सरकारी सूत्रों के अनुसार, फिलहाल विचार इस बात पर चल रहा है कि ₹2,000 से अधिक के बिजनेस (Person-to-Merchant) UPI भुगतान पर 0.25% से 0.40% तक MDR लगाया जाए। कुछ उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह दर 0.05% से 0.07% के बीच भी तय की जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति (Person-to-Person) को किए जाने वाले UPI भुगतान पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं लगाया जाएगा। यानी दोस्तों, रिश्तेदारों या व्यक्तिगत लेनदेन पर पहले की तरह कोई शुल्क नहीं लगेगा। सरकार का तर्क है कि प्रस्तावित व्यवस्था का असर अधिकांश उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक UPI के लगभग 95% लेनदेन ₹2,000 से कम के हैं, इसलिए वे MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। दूध, सब्जी, किराना, ऑटो या टैक्सी जैसे रोजमर्रा के छोटे भुगतान पहले की तरह मुफ्त बने रहने की संभावना है। हालांकि मूल्य के लिहाज से ₹2,000 से ऊपर के लेनदेन कुल UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग 65% हिस्सा रखते हैं, इसलिए बैंकिंग और भुगतान सेवा प्रदाताओं के लिए यह महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत बन सकता है। सरकार छोटे कारोबारियों को भी राहत देने की तैयारी में है। चर्चा है कि वार्षिक कारोबार ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ तक वाले व्यापारियों को MDR से पूरी तरह छूट दी जा सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि शुल्क केवल बड़े व्यापारियों और ई-कॉमर्स कंपनियों जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर लागू किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो देश के अधिकांश छोटे दुकानदार इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे। हम आपको याद दिला दें कि जनवरी 2020 में सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR समाप्त कर दिया था ताकि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक व्यापारी इसे अपनाएं। इसके बाद बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ₹2,000 से कम के UPI भुगतान पर 0.15% की प्रोत्साहन राशि देती रही है। लेकिन भुगतान उद्योग लगातार यह दलील देता रहा है कि यह सहायता पर्याप्त नहीं है और तेजी से बढ़ते डिजिटल भुगतान नेटवर्क के संचालन, साइबर सुरक्षा, तकनीकी उन्नयन तथा विस्तार की लागत लगातार बढ़ रही है। पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने भी सरकार से कई बार MDR बहाल करने की मांग की है। परिषद का कहना है कि वर्तमान सरकारी प्रोत्साहन उद्योग की वास्तविक लागत का केवल करीब 11% और संभावित MDR आय का लगभग 14% ही पूरा कर पाता है। साथ ही वित्त संबंधी संसदीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि MDR नहीं होने से UPI इकोसिस्टम की वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।




