केंद्र का किसानों को बड़ा तोहफा, कुसुम का MSP 675 रुपये बढ़ा; गेहूं में 25 रुपये की बढ़ोतरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) ने बुधवार को विपणन सत्र 2027-28 के लिए सभी अनिवार्य रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी। सरकार के मुताबिक, इसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करना है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी कुसुम के MSP में 675 रुपये प्रति क्विंटल की गई है।
किस फसल के MSP में कितनी बढ़ोतरी?
सरकार के आधिकारिक बयान के अनुसार, रबी सीजन 2027-28 के लिए:
कुसुम: 675 रुपये प्रति क्विंटल
रेपसीड और सरसों: 413 रुपये प्रति क्विंटल
मसूर: 390 रुपये प्रति क्विंटल
जौ: 136 रुपये प्रति क्विंटल
चना: 83 रुपये प्रति क्विंटल
गेहूं: 25 रुपये प्रति क्विंटल
इसमें कुसुम के MSP में सबसे अधिक और गेहूं में सबसे कम बढ़ोतरी की गई है।
MSP को लागत से 1.5 गुना रखने का प्रावधान
सरकार ने कहा कि रबी फसलों के MSP में यह बढ़ोतरी केंद्रीय बजट 2018-19 में की गई घोषणा के अनुरूप है। इसके तहत MSP को अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत के कम से कम 1.5 गुना के स्तर पर निर्धारित किया जाता है। सरकार हाल के वर्षों में अनाज के साथ दालों और तिलहनों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। इन फसलों के लिए अपेक्षाकृत अधिक MSP की व्यवस्था को इसी नीति का हिस्सा बताया गया है।
गेहूं की खरीद 3,715 लाख मीट्रिक टन पहुंची
सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं की कुल खरीद बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन (LMT) हो गई, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,254 LMT थी। इसी अवधि में छह प्रमुख रबी फसलों की खरीद भी बढ़ी। 2014-15 से 2025-26 के दौरान छह रबी फसलों की खरीद 3,921 LMT रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह 2,302 LMT थी।
MSP भुगतान में भी बड़ा इजाफा
सरकार के अनुसार, 2014-15 से 2025-26 के दौरान गेहूं उत्पादक किसानों को MSP के रूप में कुल 7.31 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.56 लाख करोड़ रुपये थी। वहीं, छह रबी फसलों के उत्पादक किसानों को 2014-15 से 2025-26 के दौरान MSP के रूप में 8.36 लाख करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, जबकि 2004-05 से 2013-14 के दौरान यह राशि 2.65 लाख करोड़ रुपये थी।सरकार के मुताबिक, MSP में बढ़ोतरी का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य उपलब्ध कराना और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना है।




