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यूपी में बैराजों की सुरक्षा मजबूत, पुराने गेट बदले गए; इमरजेंसी के लिए स्पेयर गेट तैयार

योगी सरकार ने प्रदेश की पुरानी और जर्जर जल संरचनाओं के आधुनिकीकरण के तहत प्रमुख बैराजों, बांधों और हेड रेगुलेटर के पुराने गेट बदलने के साथ आपात स्थिति के लिए स्पेयर गेट भी तैयार कराए हैं। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग का कहना है कि इससे सिंचाई व्यवस्था सुचारु रखने के साथ बाढ़ और अन्य आपदाओं के दौरान जल संरचनाओं की सुरक्षा में मदद मिलेगी। प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन अनिल गर्ग के मुताबिक, पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के चारों, लखनऊ के गोमती बैराज के सभी 10 और एटा के तातारपुर रेगुलेटर के 20 गेट बदले जा चुके हैं। नरौरा बैराज के 61 में से 13 और ओखला बैराज के 27 में से 18 गेट बदले गए हैं। ओखला के लिए तीन स्पेयर गेट भी तैयार हैं। भीमगौड़ा बैराज के आठ, रामपुर के कैनरी बैराज के नौ और हिंडन बैराज के सभी आठ गेट बदले जा चुके हैं।
विभाग के मुताबिक पहली बार कई जल संरचनाओं में 60 से 70 फीट गहराई में पानी के भीतर गेट बदलने की तकनीक अपनाई गई। माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद से अंडर-स्लूइस गेट बदले गए। कचनौदा में एक स्पेयर गेट भी तैयार रखा गया है। मौदहा, लहचूरा, खो बैराज, घाघरा और शारदा बैराज के लिए भी स्पेयर गेट तैयार किए गए हैं।
चंद्रप्रभा बांध में रिसाव रोकने पर जोर
चंदौली के चंद्रप्रभा बांध में करीब 80 फीट गहराई पर अंडर-स्लूइस गेटों से हो रहे रिसाव को रोकने के लिए विशेषज्ञ गोताखोरों और आधुनिक तकनीक की मदद ली जा रही है। विभाग ने रिसाव का स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए हैं।

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