आमों का विदेशों में 90 हजार क्विंटल से ज्यादा निर्यात, पिछले 5 सालों में किसानों को मिला उत्पादन का बढ़ावा
प्रदेश के आम की मिठास अब विदेशी बाजारों तक पहुंच रही है। बीते पांच वित्तीय वर्षों में प्रदेश से 90,844 क्विंटल से अधिक आम का निर्यात हुआ है। यूएई, सऊदी अरब, कतर समेत खाड़ी देशों और नेपाल में यूपी के आम की मांग है। निर्यात बढ़ने से किसानों को स्थानीय मंडियों से आगे व्यापक बाजार और बेहतर मूल्य के अवसर मिल रहे हैं।
खेत से विदेश तक ऐसे पहुंच रहा यूपी का आम
मंडी निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर किसानों को बेहतर और व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के लिए पैक हाउस और निर्यात सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
दशहरी-चौसा के साथ इन किस्मों पर भी नजर
मंडी परिषद ने लखनऊ, सहारनपुर, अमरोहा, गोरखपुर और वाराणसी में पैक हाउस विकसित किए हैं। यहां आम की छंटाई, ग्रेडिंग, ट्रीटमेंट और पैकेजिंग के बाद निर्यात किया जाता है।
650 से ज्यादा फार्मो का पंजीकरण
चौसा, दशहरी, रटौल के साथ आम्रपाली और गवरजीत को भी नए बाजारों से जोड़ने पर जोर है। इस वर्ष करीब 650 आम उत्पादक फार्मों का हॉर्टीनेट पर पंजीकरण कराया गया है। इससे खेत से पैक हाउस और निर्यात तक उत्पाद की ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
निर्यात में चौसा सबसे आगे
निर्यात होने वाले आम में चौसा की हिस्सेदारी करीब 55 प्रतिशत, दशहरी की 25 और रटौल की करीब 15 प्रतिशत है। इस वर्ष मंडी परिषद ने किसानों को 15 लाख मैंगो कवर भी उपलब्ध कराए हैं, जिससे गुणवत्तापूर्ण और निर्यात योग्य फल तैयार करने में मदद मिलेगी।
किसानों को दिए गए 15 लाख मैंगो कवर
इस साल मंडी परिषद ने किसानों को 15 लाख मैंगो कवर भी उपलब्ध कराए हैं। निर्यात से किसानों को नए बाजार मिल रहे हैं और उनकी उपज को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने की सुविधा प्रदेश में ही उपलब्ध हो रही है। इन प्रयासों से यूपी के आम की गुणवत्ता सुधारने के साथ विदेशी बाजारों में उसकी पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में प्रदेश के आम उत्पादकों के लिए अब बाजार सिर्फ स्थानीय मंडी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खेत से सीधे विदेश तक पहुंचने का रास्ता भी खुल रहा है।


