योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला : कंपनियों के मर्जर-डीमर्जर पर स्टांप शुल्क के नियम बदलेंगे, मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव को दी मंजूरी
उत्तर प्रदेश में कंपनियों के विलय (मर्जर) और विभाजन (डी-मर्जर) की प्रक्रिया आसान बनाने के लिए योगी सरकार ने कदम उठाया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में कंपनियों के विलय और विभाजन से संबंधित नियमावली के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके तहत कंपनियां निर्धारित स्टांप शुल्क देकर स्टांप एवं पंजीयन विभाग में पंजीकरण करा सकेंगी। हालांकि, व्यवस्था लागू होने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होगी। प्रदेश के स्टांप एवं न्यायालय शुल्क तथा पंजीयन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जायसवाल ने बताया कि गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में ऐसी व्यवस्था पहले से लागू है। उत्तर प्रदेश में इसकी व्यवस्था नहीं होने के कारण उद्यमियों को कंपनियों के विलय और विभाजन के पंजीकरण में परेशानी होती थी।
शेयर मूल्य पर 0.5 फीसदी स्टांप शुल्क
रविंद्र जायसवाल के मुताबिक, यदि कोई कंपनी दो या चार हिस्सों में विभाजित होती है अथवा कई कंपनियों का एक कंपनी में विलय होता है, तो शेयर मूल्य पर 0.5 फीसदी स्टांप शुल्क देकर स्टांप एवं पंजीयन विभाग में पंजीकरण कराया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि कंपनी के पास संपत्ति होने की स्थिति में स्टांप ड्यूटी की गणना के लिए दो प्रतिशत सर्किल रेट के बराबर शुल्क और 0.5 फीसदी की दर में से जो अधिक होगा, उसका भुगतान करना होगा।
केंद्र की मंजूरी के बाद लागू होगी व्यवस्था
जायसवाल ने कहा कि अभी कंपनी का पंजीकरण कंपनी रजिस्ट्रार के पास होता है, लेकिन विलय और विभाजन के बाद पंजीकरण के लिए स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। नई व्यवस्था से इस प्रक्रिया में सुविधा मिलने की उम्मीद है। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि यह विषय समवर्ती सूची में आता है, इसलिए केंद्र और राज्य दोनों इस पर कानून बना सकते हैं। प्रस्ताव को लागू करने के लिए भारतीय स्टांप अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता होगी। पहले इसे राज्य विधानमंडल के समक्ष रखा जाएगा और फिर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। केंद्र की स्वीकृति मिलने के बाद ही नई व्यवस्था लागू हो सकेगी।




